क्या सिर्फ माल्यार्पण और भाषणों से ही होगी हिमाचल निर्माता डॉ. यशवंत सिंह परमार को सच्ची श्रद्धांजलि?
उनकी जन्मभूमि और गृह क्षेत्र के लोग आज भी बस सेवा, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी बुनियादी सुविधाओं के लिए संघर्ष कर रहे हैं।
Himachal News: डॉ. वाईएस परमार की जयंती से पहले उठी विकास की मांग, बोले क्षेत्रवासी- श्रद्धांजलि नहीं, समस्याओं का समाधान चाहिए
नाहन (सिरमौर)। 4 अगस्त को हिमाचल निर्माता डॉ. यशवंत सिंह परमार की जयंती पूरे प्रदेश में श्रद्धा और सम्मान के साथ मनाई जाएगी। इस बीच उनके गृह क्षेत्र से विकास और बुनियादी सुविधाओं को लेकर आवाज बुलंद हुई है। क्षेत्र के नागरिकों की ओर से आशीष कुमार ने जारी प्रेस बयान में कहा कि डॉ. परमार को सच्ची श्रद्धांजलि केवल औपचारिक कार्यक्रमों, माल्यार्पण और भाषणों से नहीं, बल्कि उनके सपनों के विकसित और ग्रामीण हितैषी हिमाचल के निर्माण से ही दी जा सकती है।
उन्होंने कहा कि आज भी डॉ. परमार की जन्मभूमि और आसपास के कई ग्रामीण क्षेत्र मूलभूत सुविधाओं के अभाव से जूझ रहे हैं। सबसे बड़ी समस्या परिवहन व्यवस्था की है। नाहन–राजगढ़–टोंडा बस सेवा बंद होने से लाना बाका, नेहरसबार, लाना भल्टा, बेचरबाग, नोहराधार सहित आसपास के हजारों ग्रामीणों, किसानों, विद्यार्थियों, कर्मचारियों, महिलाओं और मरीजों को रोजाना परेशानी उठानी पड़ रही है। किसानों को अपनी उपज बाजार तक पहुंचाने में कठिनाई हो रही है, जबकि विद्यार्थियों और कर्मचारियों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ रहा है।
प्रेस बयान में सोलन–परवाणू बस सेवा को भी तत्काल बहाल करने की मांग उठाई गई। बताया गया कि यह बस पहले बगथन से परवाणू तक संचालित होती थी, लेकिन लंबे समय से बंद है। क्षेत्रवासियों का कहना है कि इस मार्ग पर निजी बसों का संचालन लाभदायक है, फिर भी सरकारी बस सेवा बंद कर दी गई है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब सरकार नई बसों की खरीद पर करोड़ों रुपये खर्च कर रही है, तो ग्रामीण क्षेत्रों के जरूरी रूट क्यों बंद किए जा रहे हैं।
शिक्षा व्यवस्था को लेकर भी गंभीर चिंता जताई गई। क्षेत्रवासियों ने बताया कि राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय बासाँह में प्रधानाचार्य, प्रवक्ता (राजनीतिशास्त्र), शारीरिक शिक्षा अध्यापक, टीजीटी मेडिकल, जूनियर ऑफिस असिस्टेंट और सीनियर असिस्टेंट सहित कई महत्वपूर्ण पद लंबे समय से रिक्त पड़े हैं। इसके अलावा मेडिकल और नॉन-मेडिकल संकाय की नियमित कक्षाएं भी अभी तक शुरू नहीं हो सकी हैं, जिससे विद्यार्थियों का भविष्य प्रभावित हो रहा है।
उन्होंने कहा कि विद्यालय में विज्ञान (साइंस) और कॉमर्स संकाय की समुचित व्यवस्था नहीं होने के कारण क्षेत्र के अनेक विद्यार्थी डॉक्टर, इंजीनियर, चार्टर्ड अकाउंटेंट और अन्य पेशेवर क्षेत्रों में आगे बढ़ने का सपना पूरा नहीं कर पाते। अधिकांश परिवार खेती-बाड़ी पर निर्भर हैं और आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण बच्चों को नाहन, सोलन या अन्य शहरों में पढ़ाई के लिए भेजना उनके लिए संभव नहीं होता। ऐसे में कई प्रतिभाशाली विद्यार्थियों को अपनी पसंद के विषय छोड़ने पड़ते हैं।
प्रेस बयान में यह भी उल्लेख किया गया कि वर्ष 1929 में आर्य पाठशाला के रूप में स्थापित तथा वर्ष 2002 में वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय बने इस ऐतिहासिक शिक्षण संस्थान की लगातार उपेक्षा चिंता का विषय है। क्षेत्रवासियों ने विद्यालय में सभी रिक्त पद भरने और विज्ञान एवं कॉमर्स संकाय की पूर्ण व्यवस्था सुनिश्चित करने की मांग की।
स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर भी नागरिकों ने सरकार से प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों और उप-स्वास्थ्य केंद्रों में डॉक्टरों, स्टाफ नर्सों, फार्मासिस्टों और अन्य स्वास्थ्य कर्मियों के सभी रिक्त पद शीघ्र भरने की मांग की। इसके साथ ही ग्रामीण सड़कों की बदहाल स्थिति, पेयजल की अनियमित आपूर्ति और सिंचाई सुविधाओं की समस्याओं का स्थायी समाधान करने की भी अपील की गई।
क्षेत्रवासियों का कहना है कि कांग्रेस और भाजपा, दोनों सरकारों के कार्यकाल में इन मूलभूत समस्याओं का स्थायी समाधान नहीं हो पाया। उन्होंने सभी जनप्रतिनिधियों और राजनीतिक दलों से दलगत राजनीति से ऊपर उठकर क्षेत्र के विकास के लिए एकजुट होकर काम करने का आग्रह किया।
उन्होंने सरकार से मांग की कि नाहन–राजगढ़–टोंडा और सोलन–परवाणू बस सेवाओं को तत्काल बहाल किया जाए, राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय बासाँह में सभी रिक्त पद भरे जाएं, विज्ञान एवं कॉमर्स संकाय की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए, स्वास्थ्य संस्थानों में स्टाफ की कमी दूर की जाए तथा सड़क, पेयजल और सिंचाई जैसी बुनियादी सुविधाओं को मजबूत किया जाए। उनका कहना है कि 4 अगस्त को डॉ. यशवंत सिंह परमार की जयंती पर यही उनके सपनों के समावेशी और विकसित हिमाचल के निर्माण की दिशा में सबसे बड़ी श्रद्धांजलि होगी।
