Himachal Weather: 6 अगस्त तक हिमाचल में मौसम का डबल अटैक! भारी बारिश, भूस्खलन और फ्लैश फ्लड का अलर्ट
अगर अगले कुछ दिनों में हिमाचल की यात्रा का प्लान बना रहे हैं तो पहले यह खबर जरूर पढ़ लें।
मौसम विभाग ने 6 अगस्त तक भारी बारिश, भूस्खलन और फ्लैश फ्लड की चेतावनी जारी करते हुए लोगों से सतर्क रहने की अपील की है।
शिमला। हिमाचल प्रदेश में मानसून एक बार फिर पूरी तरह सक्रिय हो गया है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) शिमला केंद्र के अनुसार 31 जुलाई से 6 अगस्त तक प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में हल्की से मध्यम बारिश के साथ कई स्थानों पर भारी वर्षा होने की संभावना है। लगातार बारिश के चलते भूस्खलन, फ्लैश फ्लड, सड़कें बंद होने और जलभराव जैसी समस्याओं का खतरा बढ़ गया है।
मौसम विभाग के अनुसार इस अवधि के दौरान प्रदेश के कई जिलों में अलग-अलग दिनों में भारी बारिश हो सकती है। साथ ही किन्नौर और लाहौल-स्पीति में 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने का भी अनुमान है। मैदानी और मध्य पर्वतीय क्षेत्रों में गरज-चमक के साथ तेज बारिश होने की संभावना जताई गई है।
इन जिलों में ज्यादा सतर्क रहने की जरूरत
आईएमडी के अनुसार कांगड़ा, चंबा, मंडी, कुल्लू, बिलासपुर, शिमला, सिरमौर और ऊना जिलों में विभिन्न दिनों में भारी वर्षा की चेतावनी जारी की गई है। लगातार बारिश के कारण पहाड़ी क्षेत्रों में भूस्खलन, सड़कों पर मलबा आने और यातायात प्रभावित होने की आशंका बनी हुई है।
पिछले 24 घंटे में यहां हुई सबसे ज्यादा बारिश
बीते 24 घंटों के दौरान प्रदेश के कई हिस्सों में बारिश दर्ज की गई। धर्मशाला में 15 सेंटीमीटर, चंबा के जोत में 8 सेंटीमीटर, चुवाड़ी में 7 सेंटीमीटर बारिश रिकॉर्ड की गई। इसके अलावा मंडी और किन्नौर के कई क्षेत्रों में भी अच्छी वर्षा हुई। मौसम विभाग का कहना है कि आने वाले दिनों में भी बारिश का सिलसिला जारी रह सकता है।
आईएमडी ने जारी की एडवाइजरी
मौसम विभाग ने चेतावनी दी है कि लगातार बारिश के कारण संवेदनशील इलाकों में भूस्खलन, मडस्लाइड और फ्लैश फ्लड की स्थिति बन सकती है। नदी-नालों का जलस्तर अचानक बढ़ सकता है और निचले क्षेत्रों में जलभराव की समस्या पैदा हो सकती है। फिसलन के कारण सड़क दुर्घटनाओं का जोखिम भी बढ़ सकता है।
लोगों से अपील की गई है कि खराब मौसम के दौरान अनावश्यक यात्रा से बचें, नदी-नालों के किनारे न जाएं, मौसम संबंधी अपडेट पर नजर रखें और स्थानीय प्रशासन द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का पालन करें। इससे किसी भी संभावित खतरे से बचा जा सकता है।
