शिमला में 13-14 साल के किशोर सिरिंज से ले रहे नशा, प्रशासन भी रह गया हैरान
क्या अब नशे का जाल बच्चों तक पहुंच चुका है? शिमला से सामने आई एक चौंकाने वाली जानकारी ने अभिभावकों और प्रशासन दोनों की चिंता बढ़ा दी है। महज 13 से 14 साल के किशोरों द्वारा सिरिंज के जरिए नशा करने के मामले सामने आने के बाद जिला प्रशासन ने सख्त कदम उठाने का फैसला किया है।
शिमला। जिले में कम उम्र के किशोरों के बीच नशे की बढ़ती प्रवृत्ति को लेकर गंभीर खुलासा हुआ है। जिला मुख्यालय स्थित उपायुक्त कार्यालय के बचत भवन में आयोजित जिला स्तरीय एनकॉर्ड (नारको कोऑर्डिनेशन सेंटर) की बैठक के दौरान एक स्वयंसेवी संस्था की प्रतिनिधि ने बताया कि 13 से 14 वर्ष की आयु के कई किशोर सिरिंज के माध्यम से नशे का सेवन कर रहे हैं।
बैठक में बताया गया कि सिरिंज के इस्तेमाल से न केवल बच्चों की जान को खतरा है, बल्कि हेपेटाइटिस जैसी गंभीर संक्रामक बीमारियों के फैलने का जोखिम भी बढ़ जाता है। संस्था की ओर से नशे की गिरफ्त में आए बच्चों और उनके अभिभावकों की नियमित काउंसिलिंग कराने पर विशेष जोर दिया गया।
बैठक की अध्यक्षता करते हुए उपायुक्त अनुपम कश्यप ने पुलिस विभाग को नशा तस्करों की संपत्तियों की जांच तेज करने के निर्देश दिए। साथ ही राजस्व विभाग को ऐसे मामलों में निशानदेही रिपोर्ट जल्द उपलब्ध कराने को कहा, ताकि कार्रवाई में तेजी लाई जा सके।
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उपायुक्त ने जानकारी दी कि अगस्त महीने के दौरान जिले के सभी नशा मुक्ति केंद्रों का औचक निरीक्षण किया जाएगा। निरीक्षण में केंद्रों की व्यवस्थाओं और निर्धारित मानकों का मूल्यांकन किया जाएगा। इसके बाद नशा मुक्ति केंद्रों के संचालकों के साथ विशेष कार्यशाला आयोजित कर सुधार और प्रभावी पुनर्वास व्यवस्था पर चर्चा होगी।
बैठक में पुलिस विभाग ने मादक पदार्थों की तस्करी के खिलाफ दर्ज मामलों, गिरफ्तारियों और विशेष अभियानों की जानकारी साझा की। वहीं स्वास्थ्य, शिक्षा, समाज कल्याण और अन्य विभागों ने जागरूकता अभियान तथा पुनर्वास कार्यक्रमों की प्रगति से अवगत कराया।
शिमला जिले में लगातार चिट्टा तस्करी के मामलों में युवाओं की गिरफ्तारी को देखते हुए पुलिस ने पंचायत प्रतिनिधियों से भी सहयोग की अपील की है। प्रशासन का मानना है कि नशे के खिलाफ लड़ाई केवल कानून के सहारे नहीं जीती जा सकती, बल्कि समाज की सक्रिय भागीदारी भी उतनी ही जरूरी है।
उपायुक्त अनुपम कश्यप ने कहा कि नशा मुक्त समाज का निर्माण तभी संभव है जब प्रशासन, पुलिस, विभिन्न सरकारी विभाग, स्वयंसेवी संस्थाएं और आम नागरिक मिलकर इस अभियान को जन आंदोलन का रूप दें। बैठक में वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक गौरव सिंह सहित विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद रहे।
