Himachal News: हिमाचल में कचरा प्रबंधन पर NGT की सख्ती, SADA को 4 सप्ताह में देनी होगी नई रिपोर्ट
हिमाचल प्रदेश में कचरा प्रबंधन की सुस्त रफ्तार पर अब राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने सख्त रुख अपना लिया है। कई काम पूरे होने के बावजूद अधूरे प्रोजेक्ट्स पर सवाल उठाते हुए ट्रिब्यूनल ने SADA को चार सप्ताह के भीतर नई अनुपालन रिपोर्ट दाखिल करने के निर्देश दिए हैं।
शिमला। राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) की प्रधान पीठ ने हिमाचल प्रदेश में ठोस कचरा प्रबंधन और स्वच्छता व्यवस्था की समीक्षा करते हुए विशेष क्षेत्र विकास प्राधिकरण (SADA) से विस्तृत ताजा स्थिति रिपोर्ट मांगी है। ट्रिब्यूनल ने स्पष्ट किया कि जिन कार्यों में अब तक प्रगति हुई है, उनकी जानकारी के साथ-साथ लंबित परियोजनाओं की वर्तमान स्थिति भी अगली रिपोर्ट में शामिल की जाए।
यह मामला मूल आवेदन संख्या 145/2024 (फ्रेंड्स बनाम भारत संघ एवं अन्य) से जुड़ा है। न्यायमूर्ति प्रकाश श्रीवास्तव की अध्यक्षता वाली पीठ तथा विशेषज्ञ सदस्य डॉ. अफरोज अहमद ने मामले की सुनवाई करते हुए यह निर्देश जारी किए।
कई कार्य पूरे, कुछ अभी भी अधूरे
सुनवाई के दौरान SADA ने 25 जुलाई 2026 की अनुपालन रिपोर्ट पेश की। रिपोर्ट के अनुसार सड़क किनारे फैले कचरे की सफाई, सीमा सड़क संगठन (BRO) परिसर के आसपास जमा कचरे का निष्पादन तथा बिलिंग नाला और शास्कस नाला की सफाई का कार्य पूरा कर लिया गया है। इन क्षेत्रों में नियमित निगरानी के लिए निरीक्षण व्यवस्था भी लागू कर दी गई है।
इसके अलावा निगरानी व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए सीसीटीवी कैमरों की मरम्मत पूरी हो चुकी है। हालांकि शास्कस नाला में सुरक्षा फेंसिंग का कार्य अभी पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है। SADA ने ट्रिब्यूनल को बताया कि शेष कार्य अगस्त 2026 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।
घर-घर कचरा संग्रहण का होगा विस्तार
रिपोर्ट में बताया गया कि तीन ग्राम पंचायतों में डोर-टू-डोर कचरा संग्रहण सेवा शुरू हो चुकी है। इस व्यवस्था का विस्तार चरणबद्ध तरीके से अन्य पंचायतों तक किया जाएगा और जुलाई 2027 तक इसे व्यापक रूप से लागू करने का लक्ष्य तय किया गया है।
वहीं, गीले कचरे के प्रसंस्करण केंद्र की स्थापना का प्रस्ताव अंतिम चरण में है और इसे अगस्त 2026 तक शुरू करने की योजना बनाई गई है। कचरा प्रबंधन से जुड़े प्रारूप उपनियम भी राज्य सरकार को मंजूरी और अधिसूचना के लिए भेज दिए गए हैं। स्रोत स्तर पर कचरे के पृथक्करण की प्रक्रिया जारी है और मार्च 2027 तक 100 प्रतिशत स्रोत पृथक्करण हासिल करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
याचिकाकर्ता को रिपोर्ट देने के निर्देश
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता के अधिवक्ता ने कहा कि उन्हें SADA की अनुपालन रिपोर्ट की प्रति उपलब्ध नहीं कराई गई। इस पर एनजीटी ने SADA को तीन दिनों के भीतर रिपोर्ट की प्रति उपलब्ध कराने का आदेश दिया।
ट्रिब्यूनल ने यह भी कहा कि अनुपालन रिपोर्ट में कई सकारात्मक प्रगति दिखाई देती है, लेकिन कुछ महत्वपूर्ण कार्य अब भी लंबित हैं। इसलिए SADA को चार सप्ताह के भीतर नई स्थिति रिपोर्ट दाखिल करनी होगी। साथ ही याचिकाकर्ता को रिपोर्ट पर तीन सप्ताह के भीतर अपनी आपत्तियां प्रस्तुत करने की अनुमति भी दी गई है।
इसके अलावा, सेवा शपथपत्र में सभी गैर-प्रतिनिधित्व वाले प्रतिवादियों को नोटिस भेजने का उल्लेख नहीं मिलने पर एनजीटी ने नया सेवा शपथपत्र दाखिल करने की भी अनुमति प्रदान की। मामले की अगली सुनवाई 7 अक्टूबर 2026 को निर्धारित की गई है।
