Nahan News: बिजली बोर्ड के फील्ड कर्मचारियों का फूटा गुस्सा, आंदोलन की चेतावनी; लंबित मामलों पर उठाए गंभीर सवाल
नाहन। 24 घंटे बिजली व्यवस्था संभालने वाले फील्ड कर्मचारी अब खुद न्याय की मांग को लेकर मुखर हो गए हैं।
हिमाचल प्रदेश राज्य विद्युत बोर्ड तकनीकी कर्मचारी संघ ने चेतावनी दी है कि यदि लंबित समस्याओं का जल्द समाधान नहीं हुआ तो संगठन आंदोलन का रास्ता अपनाने के लिए मजबूर होगा।
हिमाचल प्रदेश राज्य विद्युत बोर्ड तकनीकी कर्मचारी संघ (HPSEBTEU) की नाहन इकाई ने नाहन विद्युत मंडल और कार्मिक वृत्त के प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए हैं। संघ का आरोप है कि फील्ड में दिन-रात सेवाएं देने वाले तकनीकी कर्मचारियों की वर्षों से लंबित प्रशासनिक और वित्तीय समस्याओं की लगातार अनदेखी की जा रही है, जिससे कर्मचारियों में असंतोष बढ़ता जा रहा है।
संघ के अनुसार तकनीकी कर्मचारियों की पदोन्नति से जुड़े मामलों को लंबे समय तक लंबित रखा जाता है। पदोन्नति होने के बाद भी समय पर पे-फिक्सेशन नहीं किया जाता, जबकि विभिन्न भत्तों और एरियर के भुगतान के लिए कर्मचारियों को कई बार कार्यालयों के चक्कर काटने पड़ते हैं।
कर्मचारी नेताओं का कहना है कि जब किसी कर्मचारी का भत्ता रोकना हो या रिकवरी करनी हो तो विभाग तत्काल कार्रवाई करता है, लेकिन कर्मचारियों के वैध भुगतान के मामलों में अनावश्यक देरी की जाती है। चरित्र सत्यापन और अन्य प्रशासनिक प्रक्रियाओं में भी विलंब होने का आरोप लगाया गया है।
संघ ने यह भी दावा किया कि नियमित हुए कई कर्मचारियों के एनपीएस (NPS) खाते दो-दो वर्षों तक नहीं खोले गए, जिससे उन्हें आर्थिक नुकसान झेलना पड़ा। इसके अलावा सहायक लाइनमैन (ALM) नरेश कुमार का मामला उठाते हुए कहा गया कि 11 केवी लाइन पर कार्य के दौरान करंट लगने से घायल हुए कर्मचारी को घटना के पांच वर्ष बाद भी विभागीय क्लेम का भुगतान नहीं मिल पाया है।
संघ ने आरोप लगाया कि कई मामलों में कार्यालय स्टाफ अधिशासी अभियंता तक सही जानकारी नहीं पहुंचाता। इतना ही नहीं, अपने वैध कार्यों के लिए कार्यालय आने वाले कर्मचारियों के साथ भी कथित रूप से अभद्र व्यवहार किया जाता है। संगठन का कहना है कि इन शिकायतों की जानकारी उच्च अधिकारियों तक भी पहुंचाई जा चुकी है, लेकिन अब तक किसी जिम्मेदार कर्मचारी के खिलाफ कार्रवाई नहीं हुई।
तकनीकी कर्मचारी संघ ने फील्ड स्टाफ पर लगातार बढ़ते कार्यभार को भी बड़ा मुद्दा बताया। संगठन के अनुसार कर्मचारियों से सीमित स्टाफ के बावजूद 24×7 सेवाएं ली जा रही हैं। कार्यालय समय समाप्त होने के बाद भी व्हाट्सएप और फोन के माध्यम से लगातार निर्देश दिए जाते हैं, जबकि ओवरटाइम भत्ता नहीं दिया जाता। साथ ही, CCS (Conduct) Rules के तहत कार्रवाई की चेतावनी देकर मानसिक दबाव बनाने का भी आरोप लगाया गया है।
संघ ने बताया कि 7 मई 2026 को अधिशासी अभियंता कार्यालय में 24 सूत्रीय मांगपत्र सौंपा गया था, लेकिन अब तक उस पर चर्चा के लिए भी कर्मचारियों को नहीं बुलाया गया। स्मरण-पत्र देने के बावजूद भी कोई ठोस पहल नहीं की गई।
यूनिट अध्यक्ष समीर बख्श और सह सचिव राकेश आंचल ने कहा कि यदि विभागीय प्रबंधन ने जल्द सकारात्मक कदम नहीं उठाए तो तकनीकी कर्मचारी संघ लोकतांत्रिक तरीके से आंदोलन शुरू करने के लिए बाध्य होगा। वहीं संघ ने लंबित मामलों के शीघ्र निपटारे, जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय करने और फील्ड कर्मचारियों के साथ सम्मानजनक व्यवहार सुनिश्चित करने की मांग दोहराई।
