हिमाचल में भर्ती विवाद पर सियासी घमासान तेज, जयराम ठाकुर ने सुक्खू सरकार पर साधा निशाना
हिमाचल की राजनीति में भर्ती परीक्षाओं और पेपर लीक मामलों को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है। नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने सुक्खू सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि सरकार युवाओं से जुड़े मामलों में पारदर्शिता बरतने के बजाय जांच को आगे बढ़ाने से बच रही है।
शिमला से जारी बयान में पूर्व मुख्यमंत्री एवं नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू और प्रदेश सरकार पर भर्ती प्रक्रियाओं को लेकर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि पेपर लीक मामलों में दोषियों के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई नहीं की जा रही है और युवाओं को गुमराह किया जा रहा है।
जयराम ठाकुर ने कहा कि सरकार यह दावा कर रही है कि उसके कार्यकाल में कोई पेपर लीक नहीं हुआ, लेकिन प्रदेश के युवाओं को यह जानने का अधिकार है कि इस दौरान कितनी भर्ती परीक्षाएं आयोजित की गईं और उनकी स्थिति क्या रही।
उन्होंने प्री-नर्सरी शिक्षक भर्ती और स्वास्थ्य विभाग में आउटसोर्स भर्ती प्रक्रियाओं का जिक्र करते हुए आरोप लगाया कि इन मामलों में भी अनियमितताओं और भ्रष्टाचार के आरोप सामने आए, जिससे कई भर्ती प्रक्रियाएं प्रभावित हुईं।
नेता प्रतिपक्ष ने हाल ही में आयोजित पुलिस भर्ती परीक्षा को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि परीक्षा में सामूहिक नकल और पेपर खरीद-फरोख्त जैसी शिकायतें सामने आईं। उन्होंने दावा किया कि पुलिस कार्रवाई के दौरान कुछ लोगों की गिरफ्तारी, लेन-देन से जुड़े रिकॉर्ड और नकदी बरामद होने की जानकारी सामने आई, लेकिन इसके बाद जांच को आगे नहीं बढ़ाया गया।
जयराम ठाकुर ने अपनी सरकार के समय हुई 2022 पुलिस भर्ती परीक्षा का उदाहरण देते हुए कहा कि पेपर लीक की जानकारी मिलते ही तत्काल एफआईआर दर्ज की गई थी, एसआईटी का गठन किया गया, परीक्षा रद्द की गई और मामले की सीबीआई जांच की सिफारिश की गई थी।
उन्होंने दावा किया कि सीबीआई जांच के बाद कुछ अधिकारियों पर कार्रवाई की संस्तुति की गई थी, लेकिन मौजूदा सरकार ने उस रिपोर्ट पर कोई ठोस कदम नहीं उठाया।
पूर्व मुख्यमंत्री ने सरकारी नौकरियों के मुद्दे पर भी प्रदेश सरकार को घेरा। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार के कार्यकाल की तुलना में वर्तमान सरकार के दौरान स्थायी कर्मचारियों की संख्या में कमी आई है और सरकार युवाओं को स्थायी रोजगार देने में असफल रही है।
वहीं, भर्ती और पेपर लीक मामलों पर सरकार की ओर से अभी तक कोई विस्तृत प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप के बीच प्रदेश में युवाओं से जुड़े रोजगार के मुद्दे एक बार फिर चर्चा में आ गए हैं।
