हिमाचल क्रिप्टोकरेंसी स्कैम: अब जुनेजा स्क्वायर, बैंक खाते और फर्जी क्रिप्टो वॉलेट पर ईडी की नजर, 500 करोड़ घोटाले में तेज हुई कार्रवाई
शिमला। 500 करोड़ रुपये के बहुचर्चित हिमाचल क्रिप्टोकरेंसी घोटाले में अब सिर्फ गिरफ्तारी नहीं, बल्कि आरोपियों की करोड़ों की संपत्तियां भी ईडी के निशाने पर हैं।
जुनेजा स्क्वायर में कथित हिस्सेदारी से लेकर बैंक खातों, रियल एस्टेट निवेश और फर्जी क्रिप्टो वॉलेट तक की पहचान शुरू हो चुकी है। आने वाले दिनों में बड़ी कुर्की कार्रवाई देखने को मिल सकती है।
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने इस हाई-प्रोफाइल मामले में गिरफ्तार तीन आरोपियों मिलन गर्ग, सुखदेव ठाकुर और अभिषेक शर्मा की 12 दिन की कस्टडी मिलने के बाद जांच को और तेज कर दिया है। अब एजेंसी अपराध से अर्जित संपत्तियों (Proceeds of Crime) की पहचान कर उनकी कुर्की और पूरे मनी ट्रेल को स्थापित करने में जुट गई है।
जुनेजा स्क्वायर, बैंक खाते और डिजिटल संपत्तियां जांच के दायरे में
ईडी पीएमएलए (धन शोधन निवारण अधिनियम) के तहत उन सभी संपत्तियों की जांच कर रही है, जिन्हें कथित तौर पर घोटाले की रकम से खरीदा गया। जांच के दायरे में जुनेजा स्क्वायर में कथित लाभकारी हिस्सेदारी, आरोपियों के बैंक खाते, रियल एस्टेट निवेश, क्रिप्टो वॉलेट और अन्य डिजिटल परिसंपत्तियां शामिल हैं।
सूत्रों के अनुसार पर्याप्त साक्ष्य मिलने पर ईडी पीएमएलए की धारा-5 के तहत इन संपत्तियों की अनंतिम कुर्की (Provisional Attachment) की कार्रवाई कर सकती है, ताकि जांच के दौरान कोई भी आरोपी संपत्तियों को बेच या स्थानांतरित न कर सके।
12 दिन की कस्टडी में डिजिटल सबूत जुटाने पर फोकस
विशेष पीएमएलए अदालत से मिली 12 दिन की कस्टडी के दौरान ईडी की साइबर और डिजिटल फॉरेंसिक टीमें आरोपियों से क्रिप्टो वॉलेट की प्राइवेट-की, विदेशी सर्वरों के एक्सेस लॉग, आईपी एड्रेस, डोमेन संचालन, क्लाउड डेटा और टेलीग्राम-व्हाट्सएप चैट जैसे अहम तकनीकी साक्ष्य जुटाएंगी।
जांच एजेंसी यह भी पता लगाएगी कि निवेशकों का पैसा किन माध्यमों से क्रिप्टोकरेंसी में बदला गया, किन वॉलेट में भेजा गया और बाद में किन देशों या प्लेटफॉर्म के जरिए उसकी लेयरिंग और इंटीग्रेशन किया गया।
फरार मास्टरमाइंड सुभाष शर्मा तक पहुंचना सबसे बड़ी चुनौती
ईडी के सामने सबसे बड़ी चुनौती इस घोटाले के कथित मास्टरमाइंड सुभाष शर्मा तक पहुंचना है, जो अभी फरार बताया जा रहा है। जांच एजेंसी उसके अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क, विदेशी डिजिटल सर्वरों और क्रिप्टो वॉलेट से जुड़े संभावित लिंक भी खंगाल रही है।
2.48 लाख निवेशकों के पैसे की रिकवरी पर फोकस
जांच एजेंसी का उद्देश्य केवल आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं, बल्कि अपराध से अर्जित पूरी संपत्ति का पता लगाकर उसे कानूनी प्रक्रिया के तहत जब्त करना और अदालत के समक्ष मजबूत मनी ट्रेल पेश करना भी है।
फॉरेंसिक जांच में अब तक 2.48 लाख से अधिक निवेशकों के इस नेटवर्क से प्रभावित होने और करीब 219 मिलियन अमेरिकी डॉलर के लेनदेन के संकेत मिले हैं। ईडी अब बैंक रिकॉर्ड, डिजिटल साक्ष्यों, क्रिप्टो ट्रांजैक्शन और रियल एस्टेट निवेशों को जोड़कर पूरी वित्तीय श्रृंखला स्थापित करने में जुटी है।
जांच पूरी होने के बाद ईडी विशेष पीएमएलए अदालत में अभियोजन शिकायत (प्रॉसिक्यूशन कंप्लेंट) दाखिल करेगी। यदि अदालत कुर्की की पुष्टि करती है, तो जब्त संपत्तियां न्यायिक प्रक्रिया के तहत रहेंगी और कानून के अनुसार निवेशकों के हितों की सुरक्षा की दिशा में आगे की कार्रवाई की जाएगी।
