Table of Contents
हिमाचल: बद्दी और कालाअंब के दवा उद्योग के लिए अच्छी खबर, एमएसएमई पर केंद्र का बड़ा फोकस; दिल्ली में जेपी नड्डा ने रखा विजन
हिमाचल के दवा उद्योग के लिए बड़ी खबर! केंद्र की नई नीति से बद्दी और कालाअंब के फार्मा एमएसएमई को मिल सकती है नई रफ्तार
दिल्ली में जेपी नड्डा ने कहा- भारत को दवा निर्माण का ग्लोबल हब बनाने में एमएसएमई सेक्टर निभाएगा सबसे अहम रोल

नई दिल्ली/बद्दी/कालाअंब, 25 जुलाई। हिमाचल प्रदेश के फार्मा उद्योग, विशेषकर बद्दी-बरोटीवाला-नालागढ़ (बीबीएन) और सिरमौर के कालाअंब औद्योगिक क्षेत्र में संचालित दवा निर्माण इकाइयों के लिए राहत और उम्मीद भरी खबर सामने आई है। केंद्र सरकार ने साफ संकेत दिए हैं कि आने वाले वर्षों में देश को दवा निर्माण के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने और वैश्विक स्तर पर नई पहचान दिलाने में एमएसएमई फार्मा सेक्टर सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
नई दिल्ली के इंडिया हैबिटेट सेंटर में लघु उद्योग भारती द्वारा आयोजित एलयूबी फार्मा कॉन्क्लेव-2026 में केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री जेपी नड्डा ने कहा कि भारत को अफोर्डेबल मेडिसिन, बल्क ड्रग्स, वैक्सीन और मेडिकल डिवाइसेस के निर्माण में विश्वस्तरीय ताकत बनाने की दिशा में तेजी से काम किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि इस लक्ष्य को हासिल करने में एमएसएमई इकाइयों की भागीदारी निर्णायक होगी।
उन्होंने देशभर के दवा निर्माताओं से उत्पादन बढ़ाने के साथ-साथ गुणवत्ता (क्वालिटी) को सर्वोच्च प्राथमिकता देने का आह्वान किया। नड्डा ने कहा कि आज दुनिया भारत में बनी दवाओं पर भरोसा करती है और यदि गुणवत्ता पर लगातार ध्यान दिया जाए तो ‘ब्रांड भारत’ की पहचान वैश्विक स्तर पर और मजबूत होगी। उन्होंने बताया कि दुनिया के कुल वैक्सीन उत्पादन में भारत लगभग 60 प्रतिशत योगदान देता है और फार्मा निर्यात में भी देश लगातार नई ऊंचाइयों को छू रहा है।
हिमाचल के उद्योग के लिए क्यों है अहम?
हिमाचल प्रदेश का बद्दी-बरोटीवाला-नालागढ़ (बीबीएन) देश के सबसे बड़े फार्मा हब में शामिल है, जबकि कालाअंब औद्योगिक क्षेत्र में भी बड़ी संख्या में दवा निर्माण इकाइयाँ संचालित हैं। ऐसे में केंद्र सरकार द्वारा एमएसएमई आधारित फार्मा उद्योग को प्राथमिकता देने, गुणवत्ता सुधार और नियामकीय मानकों के पालन पर दिया गया जोर राज्य के दवा उद्योग के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। उद्योग जगत का मानना है कि इससे भविष्य में निवेश, निर्यात और प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता को मजबूती मिल सकती है।
दिल्ली में क्या-क्या हुआ?
कॉन्क्लेव की थीम ‘विकसित भारत-2047 के लिए फार्मा सेक्टर का रोडमैप’ रही। कार्यक्रम में फार्मास्यूटिकल्स विभाग के सचिव मनोज जोशी ने कहा कि गुणवत्ता में छोटी सी कमी का फायदा बड़ी कंपनियों को मिलता है, इसलिए एमएसएमई इकाइयों को नियामकीय मानकों और कंप्लायंस का सख्ती से पालन करना होगा।
ड्रग कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया राजीव सिंह रघुवंशी ने नए रेगुलेशन की जानकारी देते हुए कहा कि एमएसएमई क्लस्टर के माध्यम से नियमों का बेहतर ढंग से पालन किया जा सकता है। वहीं महाराष्ट्र के फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन के आयुक्त तुकाराम मुंडे ने प्रशासनिक ऑडिट और गुणवत्ता नियंत्रण पर विस्तार से जानकारी दी।
फार्मा आइकॉन अवॉर्ड से हुआ सम्मान
कॉन्क्लेव के दौरान फार्मा क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाले पांच सफल उद्यमियों को फार्मा आइकॉन अवॉर्ड से सम्मानित किया गया। साथ ही लघु उद्योग भारती के फार्मा उत्पाद समूह के प्रमुख डॉ. राजेश गुप्ता ने उद्योग की प्रमुख चुनौतियों से संबंधित ज्ञापन केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा को सौंपा।
कॉन्क्लेव में देश के दस राज्यों के ड्रग कंट्रोलर्स सहित लगभग 400 दवा उत्पादकों ने भाग लिया। इस अवसर पर लघु उद्योग भारती के राष्ट्रीय संगठन महामंत्री प्रकाश चंद्र, राष्ट्रीय अध्यक्ष मधुसूदन दादू, राष्ट्रीय समन्वयक घनश्याम ओझा तथा फार्मा कमेटी के सदस्य संजय सिंघला, रवलीन सिंह, रोहित भाटिया और अमित चावला भी मौजूद रहे।
