Himachal High Court: सिर्फ वेबसाइट पर आदेश डालना काफी नहीं, कर्मचारियों को व्यक्तिगत सूचना देना जरूरी
वेतन से जुड़े आदेश पर हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणी, HPSEBL की अपील खारिज
शिमला। अगर किसी सरकारी विभाग को लगता है कि वेबसाइट पर आदेश अपलोड कर देने से उसकी जिम्मेदारी पूरी हो जाती है, तो हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट का ताजा फैसला इस सोच को बदल सकता है।
हाईकोर्ट ने साफ कहा है कि कर्मचारियों के वेतन या वित्तीय हितों को प्रभावित करने वाले आदेशों की जानकारी व्यक्तिगत और स्वीकृत माध्यम से देना विभाग की जिम्मेदारी है, केवल वेबसाइट पर प्रकाशित करना पर्याप्त नहीं।
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा है कि वेतन संशोधन, पदोन्नति या किसी भी ऐसी नीति से जुड़े आदेश, जिनका कर्मचारियों के वित्तीय अधिकारों पर सीधा असर पड़ता हो, उन्हें सिर्फ विभागीय वेबसाइट पर अपलोड कर देना पर्याप्त नहीं माना जा सकता। विभाग या संस्था को यह सुनिश्चित करना होगा कि ऐसी सूचना संबंधित कर्मचारियों तक उचित और अधिकृत माध्यम से पहुंचे।
मुख्य न्यायाधीश गुरमीत सिंह संधावालिया और न्यायाधीश विपिन चंद्र नेगी की खंडपीठ ने यह टिप्पणी करते हुए हिमाचल प्रदेश स्टेट इलेक्ट्रिसिटी बोर्ड लिमिटेड (HPSEBL) की अपील को खारिज कर दिया। अदालत ने एकल पीठ के फैसले को बरकरार रखते हुए कर्मचारी नरेंद्र कुमार को 15 प्रतिशत वेतन वृद्धि का विकल्प चुनने की अनुमति देने का आदेश कायम रखा।
क्या है पूरा मामला?
याचिकाकर्ता नरेंद्र कुमार HPSEBL में वरिष्ठ सहायक के पद पर कार्यरत हैं। उन्हें 1 मई 2017 को पदोन्नति मिली थी। बोर्ड ने 13 अप्रैल 2022 को एक आदेश जारी किया था, जिसके तहत 1 जनवरी 2016 से 12 अप्रैल 2022 के बीच पदोन्नत कर्मचारियों को 15 प्रतिशत वेतन वृद्धि का विकल्प चुनने का अवसर दिया गया था।
नरेंद्र कुमार का कहना था कि उस समय वे फील्ड में तैनात थे और उन्हें इस आदेश की जानकारी समय पर नहीं मिल सकी। जनवरी 2023 में मुख्यालय में स्थानांतरण के बाद उन्हें पता चला कि उनसे जूनियर कर्मचारी अधिक वेतन प्राप्त कर रहे हैं।
बोर्ड ने अंतिम तिथि का दिया हवाला
जब नरेंद्र कुमार ने 15 प्रतिशत वेतन वृद्धि का विकल्प देने की मांग करते हुए अभ्यावेदन दिया, तो बिजली बोर्ड ने यह कहते हुए आवेदन खारिज कर दिया कि विकल्प चुनने की अंतिम तिथि 12 अक्टूबर 2022 समाप्त हो चुकी है।
इसके बाद उन्होंने हाईकोर्ट का रुख किया। एकल पीठ ने कर्मचारी के पक्ष में फैसला सुनाया, जिसके खिलाफ HPSEBL ने डिवीजन बेंच में अपील दायर की।
हाईकोर्ट ने क्या कहा?
खंडपीठ ने स्पष्ट किया कि जिन आदेशों का कर्मचारियों के वेतन और वित्तीय हितों पर प्रभाव पड़ता है, उनकी जानकारी कर्मचारियों तक पहुंचाना विभाग की जिम्मेदारी है। केवल यह कहना कि आदेश वेबसाइट पर उपलब्ध था, विभाग को अपनी जिम्मेदारी से मुक्त नहीं कर सकता।
अदालत ने माना कि यदि कर्मचारी को समय पर सूचना नहीं मिली और इससे उसे वित्तीय नुकसान हुआ है, तो उसे राहत देने से इनकार नहीं किया जा सकता।
कर्मचारी को मिलेगा लाभ
हाईकोर्ट के फैसले के बाद नरेंद्र कुमार को 15 प्रतिशत वेतन वृद्धि का विकल्प चुनने की अनुमति मिलेगी। साथ ही, उनके और उनके जूनियर कर्मचारियों के वेतन में उत्पन्न हुई विसंगति को भी दूर किया जाएगा। यह फैसला भविष्य में सरकारी विभागों और सार्वजनिक उपक्रमों के लिए भी महत्वपूर्ण नजीर माना जा रहा है, क्योंकि अब केवल वेबसाइट पर आदेश अपलोड करना पर्याप्त नहीं होगा।
