हिमाचल हाईकोर्ट सख्त: अब नदियों-खड्डों में कचरा फेंका तो होगी जवाबदेही, डीसी से मांगी रिपोर्ट
क्या आपके शहर का कचरा भी नदी या खड्ड के किनारे फेंका जा रहा है? अब ऐसा हुआ तो सिर्फ स्थानीय निकाय ही नहीं, जिला प्रशासन को भी हाईकोर्ट के सामने जवाब देना होगा।
शिमला। हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने राज्य में बढ़ते ठोस कचरा प्रबंधन के संकट पर कड़ा रुख अपनाते हुए स्पष्ट कर दिया है कि नदियों और खड्डों के किनारे किसी भी स्थिति में कचरा नहीं डाला जाएगा। अदालत ने कहा कि यह पर्यावरण और जल स्रोतों के लिए गंभीर खतरा है तथा इसे रोकना जिला प्रशासन और स्थानीय निकायों की प्राथमिक जिम्मेदारी है।
मुख्य न्यायाधीश गुरमीत सिंह संधावालिया और न्यायाधीश बिपिन चंद्र नेगी की खंडपीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए सुन्नी में सतलुज नदी किनारे स्थित ठोस कचरा प्रबंधन संयंत्र को तत्काल सुरक्षित स्थान पर स्थानांतरित करने के निर्देश दिए। अदालत ने कहा कि मानसून के दौरान बाढ़ आने पर वहां से कचरा नदी में बहने का खतरा बना रहता है, जिससे जल प्रदूषण बढ़ सकता है।
सुनवाई के दौरान हमीरपुर की ब्यास नदी, कुणाह खड्ड, मैहरे और सलौणी क्षेत्र, चंबा की रावी नदी तथा करियां फॉरेस्ट बैरियर के पास अवैध डंपिंग का मुद्दा भी उठा। हाईकोर्ट ने इन मामलों को गंभीर मानते हुए शिमला, चंबा, बिलासपुर, कांगड़ा और कुल्लू के उपायुक्तों को व्यक्तिगत रूप से जवाबदेह ठहराया और अगली सुनवाई तक सुधारात्मक कार्रवाई की विस्तृत रिपोर्ट दाखिल करने के आदेश दिए हैं। मामले की अगली सुनवाई 26 अगस्त को होगी।
सिरमौर की भी रिपोर्ट तलब
डीएलएसए की रिपोर्ट में नाहन-कुमारहट्टी और देहरादून-पांवटा साहिब राष्ट्रीय राजमार्ग की नालियों में गंदगी जमा होने का उल्लेख किया गया। वहीं नाहन के वार्ड-7 में कचरा प्रबंधन प्रभावित होने के कारण बंदरों का आतंक बढ़ने की बात भी सामने आई। इस पर हाईकोर्ट ने उपायुक्त सिरमौर से विस्तृत रिपोर्ट मांगी है।
कई जिलों में कचरा प्रबंधन की समीक्षा
अदालत के समक्ष प्रस्तुत रिपोर्ट में बताया गया कि रोहड़ू नगर परिषद प्रतिदिन करीब 2.98 मीट्रिक टन कचरा एकत्र कर रही है और अब तक 19 टन प्लास्टिक अपशिष्ट का निस्तारण किया जा चुका है। वहीं कोटखाई में घर-घर से शत-प्रतिशत कचरा संग्रहण की व्यवस्था लागू है।
दूसरी ओर रामपुर और जुब्बल के एमआरएफ प्लांटों में आग लगने से मशीनरी और कई टन सूखा कचरा नष्ट होने की जानकारी भी अदालत को दी गई। नेरवा, चौपाल, चिड़गांव और जुब्बल में प्रस्तावित कचरा प्रबंधन परियोजनाएं वन स्वीकृतियां लंबित होने के कारण आगे नहीं बढ़ पा रही हैं।
बद्दी में पुराने कचरे के निस्तारण का लक्ष्य
अदालत को बताया गया कि केंदुवाल (बद्दी) में दिसंबर 2025 से अप्रैल 2026 के बीच आए 21,856 टन कचरे में से 20,440 टन का प्रसंस्करण किया जा चुका है। इसके अलावा बद्दी में जमा 76,905 मीट्रिक टन पुराने कचरे को 31 दिसंबर 2027 तक पूरी तरह समाप्त करने का लक्ष्य तय किया गया है। इसके लिए बायोगैस प्लांट और बड़े शेड का निर्माण भी किया जा रहा है।
लाहौल-स्पीति की सराहना, कंडाघाट मामले में निर्देश
हाईकोर्ट ने लाहौल-स्पीति में कचरा प्रबंधन की पहल की सराहना करते हुए कहा कि जिला प्रशासन ने दिसंबर 2026 तक शत-प्रतिशत स्रोत स्तर पर कचरा पृथक्करण का लक्ष्य निर्धारित किया है। केलांग क्षेत्र में सूखे और गीले कचरे का अलग-अलग संग्रहण शुरू हो चुका है।
वहीं सोलन के कंडाघाट स्थित तंदाल में प्रस्तावित सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट का काम वर्ष 2024 से न्यायिक रोक के कारण रुका हुआ है। इस मामले में हाईकोर्ट ने सिविल जज कंडाघाट को शीघ्र सुनवाई कर रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं।
