Home शिक्षा Good News: IIT मंडी का बड़ा कमाल, सिर्फ एक बूंद खून से होगी लिवर और किडनी की जांच! एआई तकनीक को मिला पेटेंट

Good News: IIT मंडी का बड़ा कमाल, सिर्फ एक बूंद खून से होगी लिवर और किडनी की जांच! एआई तकनीक को मिला पेटेंट

by Dainik Janvarta
0 comment

IIT Mandi News: अब सिर्फ एक बूंद खून से मिनटों में मिल सकता है लिवर और किडनी रोग का संकेत, आईआईटी मंडी की AI तकनीक को मिला पेटेंट

अगर भविष्य में लिवर और किडनी की गंभीर बीमारियों का पता सिर्फ एक बूंद खून से चल जाए, तो क्या होगा?
आईआईटी मंडी के वैज्ञानिकों ने इस कल्पना को हकीकत बनाने की दिशा में बड़ी कामयाबी हासिल की है। उनकी एआई आधारित नई जांच तकनीक को भारतीय पेटेंट मिल गया है।

मंडी। हिमाचल प्रदेश स्थित भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) मंडी ने स्वास्थ्य क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। संस्थान के वैज्ञानिकों द्वारा विकसित आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित संपर्क रहित डायग्नोस्टिक तकनीक को भारतीय पेटेंट प्राप्त हुआ है। यह तकनीक महज 50 माइक्रो लीटर सीरम (खून की एक छोटी बूंद) का विश्लेषण करके लिवर और किडनी से जुड़ी संभावित बीमारियों का शुरुआती आकलन करने में सक्षम है।

बिना किसी सतह के संपर्क के होगी जांच

इस तकनीक की सबसे खास बात यह है कि जांच के दौरान सीरम की बूंद किसी टेस्ट ट्यूब, कांच की स्लाइड या अन्य सतह के संपर्क में नहीं आती। इसके लिए अकूस्टिक लेविटेशन (Acoustic Levitation) तकनीक का इस्तेमाल किया जाता है, जिसमें ध्वनि तरंगों की सहायता से बूंद को हवा में स्थिर रखा जाता है।

इसके बाद स्पेक्ट्रोफोटोमेट्रिक विश्लेषण और एआई आधारित मशीन लर्निंग मॉडल की मदद से बिलीरुबिन का स्तर मापा जाता है। इसी आधार पर सिस्टम लिवर और किडनी संबंधी संभावित रोगों का प्रारंभिक संकेत देता है।

दूषित होने का खतरा होगा कम

शोधकर्ताओं के अनुसार, चूंकि नमूना किसी सतह को नहीं छूता, इसलिए उसके दूषित होने की संभावना काफी कम हो जाती है। साथ ही बेहद कम मात्रा में लिए गए नमूने से भी विश्वसनीय जांच संभव हो सकती है। यह तकनीक भविष्य में तेज, सुरक्षित और कम लागत वाली जांच का विकल्प बन सकती है।

अब प्रोटोटाइप पर चल रहा काम

आईआईटी मंडी के वैज्ञानिकों ने बताया कि इस तकनीक का प्रयोगशाला स्तर पर सफल सत्यापन किया जा चुका है। फिलहाल इसका कार्यशील प्रोटोटाइप विकसित किया जा रहा है। भविष्य में इसे अस्पतालों, क्लीनिकल लैब, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों, पॉइंट ऑफ केयर डायग्नोस्टिक सेंटर और आपातकालीन चिकित्सा सेवाओं में उपयोग के लिए तैयार किया जाएगा।

विशेषज्ञों का मानना है कि दूरदराज के उन क्षेत्रों में, जहां आधुनिक जांच सुविधाएं उपलब्ध नहीं हैं, यह तकनीक मरीजों के लिए बेहद उपयोगी साबित हो सकती है।

2025 में किया गया था पेटेंट आवेदन

इस नवाचार के लिए पेटेंट आवेदन 24 मई 2025 को दाखिल किया गया था, जिसे 29 अप्रैल 2026 को मंजूरी मिल गई। इस परियोजना को आईआईटी मंडी कैटलिस्ट के निद्धि प्रयास कार्यक्रम का सहयोग प्राप्त हुआ है। अब शोध दल इस तकनीक के व्यावसायीकरण के लिए उद्योग साझेदारों की तलाश कर रहा है और इस पर आधारित शोधपत्र भी तैयार किया जा रहा है।

इन वैज्ञानिकों ने निभाई अहम भूमिका

इस शोध एवं नवाचार में देओकृष्ण कुमार चौधरी, योगेश दासगांवकर, डॉ. दुबे धीरज प्रकाशचंद, डॉ. राधे श्याम शर्मा और डॉ. रविंद्र नाइक बुक्के का महत्वपूर्ण योगदान रहा है।

शोधकर्ता ने क्या कहा?

आईआईटी मंडी के शोधकर्ता डॉ. राधे श्याम शर्मा ने बताया कि तकनीक का प्रयोगशाला स्तर पर सफल सत्यापन हो चुका है और अब इसका कार्यशील प्रोटोटाइप विकसित किया जा रहा है। भविष्य में इसे अस्पतालों, क्लीनिकल लैब, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों और पॉइंट ऑफ केयर डायग्नोस्टिक केंद्रों में उपयोग के लिए विकसित करने की योजना है।

You may also like

Leave a Comment

About Us

दैनिक जनवार्ता एक निष्पक्ष और राष्ट्र के प्रति समर्पित वेब न्यूज़ पोर्टल है। हमारा उद्देश्य सच्ची, निर्भीक और संतुलित पत्रकारिता के माध्यम से भारत की एकता, अखंडता और संप्रभुता की रक्षा करना है। हम जाति, धर्म, लिंग, भाषा और संप्रदाय से ऊपर उठकर निष्पक्ष खबरें प्रस्तुत करते हैं। स्वैच्छिक संवाददाताओं की टीम के सहयोग से हम राष्ट्रहित को सर्वोपरि मानते हुए विश्वसनीय सूचना जन-जन तक पहुँचाने का मिशन चला रहे हैं।

Contact for Design your website - 9318329982
Anshul Gupta
Software Engineer

@2023 – All Right Reserved. Designed and Developed DainikJanvarta

Adblock Detected

Please support us by disabling your AdBlocker extension from your browsers for our website.