हिमाचल के सरकारी और निजी स्कूलों ने पूरे देश में अपनी अलग पहचान बनाई है। स्वच्छता और हरित परिसर के क्षेत्र में शानदार प्रदर्शन करते हुए प्रदेश के 11 स्कूलों ने राष्ट्रीय स्तर पर बड़ा सम्मान हासिल किया है।
स्वच्छता और हरित पहल में हिमाचल के 11 स्कूलों को राष्ट्रीय सम्मान, 11 विद्यालयों ने बढ़ाया प्रदेश का गौरव
शिमला: केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय की स्वच्छ एवं हरित विद्यालय रेटिंग 2025-26 में हिमाचल प्रदेश के 11 स्कूलों ने राष्ट्रीय स्तर पर सर्टिफिकेट ऑफ मेरिट प्राप्त कर प्रदेश का नाम रोशन किया है। कड़ी प्रतिस्पर्धा के बीच राष्ट्रीय मेरिट सूची में इन विद्यालयों का चयन स्वच्छता, पर्यावरण संरक्षण और सतत विकास के क्षेत्र में उनके उत्कृष्ट कार्यों का प्रमाण माना जा रहा है।
ग्रामीण श्रेणी-1 में बिलासपुर के प्राथमिक विद्यालय नंद ने राष्ट्रीय स्तर पर तीसरा स्थान हासिल किया। इसके अलावा कुल्लू का हाई स्कूल चिला एच छठे, सिरमौर का मिडिल स्कूल धमून 14वें, ऊना का प्राथमिक विद्यालय गगरेट 22वें, कांगड़ा का प्राथमिक विद्यालय बंडोल 32वें तथा कुल्लू का स्नोवर वैली इंटरनेशनल स्कूल 55वें स्थान पर रहा।
वहीं ग्रामीण श्रेणी-2 में सिरमौर के पीएम श्री पंडित दीनदयाल स्कूल नारग ने राष्ट्रीय स्तर पर तीसरा स्थान प्राप्त किया। हमीरपुर के जवाहर नवोदय विद्यालय भोरंज को 10वां स्थान मिला, जबकि ऊना के राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय बुधान और सोलन के द लॉरेंस स्कूल, सनावर संयुक्त रूप से 31वें स्थान पर रहे।
शहरी श्रेणी-2 में कांगड़ा के जवाहर नवोदय विद्यालय बैजनाथ ने राष्ट्रीय स्तर पर 14वां स्थान हासिल कर प्रदेश का गौरव बढ़ाया।
विद्यालयों का चयन स्वच्छता, ठोस एवं तरल अपशिष्ट प्रबंधन, जल संरक्षण, ऊर्जा दक्षता और हरित परिसर विकास जैसे विभिन्न मानकों पर उत्कृष्ट प्रदर्शन के आधार पर किया गया। चयनित प्रत्येक विद्यालय को एक लाख रुपये की प्रोत्साहन राशि के साथ सर्टिफिकेट ऑफ मेरिट प्रदान किया जाएगा। इसके अलावा विद्यालयों के प्रधानाचार्यों और प्रधानाध्यापकों के लिए विशेष शैक्षणिक एक्सपोजर विजिट भी आयोजित की जाएगी।
समग्र शिक्षा निदेशक राजेश शर्मा ने इस उपलब्धि पर चयनित विद्यालयों, शिक्षकों, विद्यार्थियों और स्थानीय समुदाय को बधाई देते हुए कहा कि हिमाचल प्रदेश में स्वच्छ, हरित और टिकाऊ विद्यालय परिसरों के विकास को प्राथमिकता दी जा रही है। उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि सभी हितधारकों के सामूहिक प्रयासों का परिणाम है और भविष्य में भी ऐसे प्रयासों को निरंतर बढ़ावा दिया जाएगा।
