हॉकी कन्या छात्रावास की बेटियां मैदान में जीत रही हैं मुकाबले, लेकिन रोजमर्रा की जरूरतों के लिए घर पर हैं निर्भर।
भोजन और रहने की सुविधा सरकार दे रही है, मगर साबुन, टूथपेस्ट, तेल और अन्य जरूरी स्वच्छता सामग्री के लिए खिलाड़ियों को अब भी अपने परिवारों पर निर्भर रहना पड़ रहा है।
हॉकी कन्या छात्रावास माजरा की खिलाड़ियों की मूलभूत आवश्यकताओं पर भी सरकार दे ध्यान
पांवटा साहिब (सिरमौर): माजरा स्थित हॉकी कन्या छात्रावास में वर्तमान में हिमाचल प्रदेश की लगभग 30 प्रतिभाशाली महिला हॉकी खिलाड़ी रहकर अपनी खेल प्रतिभा को निखार रही हैं। इन खिलाड़ियों के रहने और पौष्टिक भोजन की व्यवस्था का खर्च राज्य सरकार द्वारा वहन किया जाता है, जबकि उनकी शिक्षा का खर्च उनके अभिभावक उठाते हैं।
हालांकि, छात्रावास से जुड़ा एक महत्वपूर्ण विषय ऐसा भी है, जिस पर गंभीरता से विचार किए जाने की आवश्यकता महसूस की जा रही है। छात्रावास में रहने वाली खिलाड़ियों को अपनी दैनिक व्यक्तिगत आवश्यकताओं, जैसे साबुन, टूथपेस्ट, टूथब्रश, बालों का तेल, शैम्पू, सैनिटरी हाइजीन से जुड़ी सामग्री तथा अन्य स्वच्छता संबंधी वस्तुएं अपने घर से मंगवानी पड़ती हैं। आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों से आने वाली कई खिलाड़ियों के लिए यह अतिरिक्त खर्च वहन करना आसान नहीं होता।
खेल विशेषज्ञों और अभिभावकों का कहना है कि जब सरकार खिलाड़ियों के लिए आवास और भोजन जैसी मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध करा रही है, तो व्यक्तिगत स्वच्छता से जुड़ी आवश्यक वस्तुओं की व्यवस्था भी सुनिश्चित की जानी चाहिए। एक खिलाड़ी के लिए बेहतर प्रदर्शन के साथ-साथ अच्छी स्वच्छता और स्वास्थ्य भी उतने ही महत्वपूर्ण हैं, जितना नियमित प्रशिक्षण और संतुलित आहार।
स्थानीय लोगों का भी मानना है कि ये खिलाड़ी कड़ी मेहनत कर भविष्य में प्रदेश और देश का नाम राष्ट्रीय तथा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर रोशन करने का सपना देख रही हैं। ऐसे में यदि सरकार उन्हें मासिक स्वच्छता किट उपलब्ध कराए, तो इससे न केवल उनका मनोबल बढ़ेगा बल्कि उनके परिवारों पर पड़ने वाला अतिरिक्त आर्थिक बोझ भी कम होगा।
क्षेत्र के लोगों ने प्रदेश सरकार, खेल विभाग तथा संबंधित अधिकारियों से मांग की है कि माजरा हॉकी कन्या छात्रावास सहित प्रदेश के सभी खेल छात्रावासों में रहने वाले खिलाड़ियों के लिए नियमित रूप से मासिक व्यक्तिगत स्वच्छता किट उपलब्ध कराने की व्यवस्था की जाए। इससे खिलाड़ियों को बेहतर सुविधाएं मिलेंगी और वे बिना किसी अतिरिक्त चिंता के अपना पूरा ध्यान अपनी पढ़ाई और खेल पर केंद्रित कर सकेंगी।
