शिमला: HPU छात्रावास में खाने को लेकर मचा हड़कंप, जांच में मिली खराब सामग्री, प्रशासन ने तुरंत बदले दो मेस मैनेजर
क्या छात्राओं की थाली में परोसा जा रहा था खराब खाना?
एचपीयू छात्रावास से सामने आए इस मामले के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन हरकत में आ गया और देर रात तक जांच के बाद बड़ा फैसला लिया गया।
शिमला। हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय (एचपीयू) के विद्योत्तमा छात्रावास में भोजन की गुणवत्ता को लेकर उठे सवालों के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन ने तत्काल कार्रवाई करते हुए दो मेस मैनेजरों को बदल दिया है। छात्राओं द्वारा खाने में इस्तेमाल की जा रही सब्जियों की गुणवत्ता पर आपत्ति जताए जाने के बाद पूरे मामले की जांच कराई गई, जिसमें मेस में रखी कुछ खराब सब्जियां और अन्य खाद्य सामग्री मिलने की पुष्टि हुई।
मामला सामने आने के बाद डीन छात्र कल्याण (डीएसडब्ल्यू) प्रोफेसर आर.एल. जिंटा ने शुक्रवार देर रात छात्रावास में बैठक बुलाई। बैठक में हॉस्टल वार्डन डॉ. भावना, छात्राएं और मेस स्टाफ भी मौजूद रहे। सभी पक्षों से विस्तृत जानकारी लेने के साथ-साथ मेस और स्टोर रूम का निरीक्षण भी किया गया।
जांच में पता चला कि छात्रावास के लिए सब्जियां एक स्थानीय विक्रेता से खरीदी जाती थीं, जो हर तीसरे दिन हॉस्टल में आपूर्ति करता था। मेस प्रबंधन एक साथ कई दिनों की सब्जियां खरीदकर स्टोर में रख देता था। छात्राओं की संख्या अपेक्षाकृत कम होने और शिमला के मौसम में नमी अधिक रहने के कारण कुछ सब्जियां खराब हो गईं, जिन पर फफूंद और काले धब्बे दिखाई दिए।
प्रशासन के अनुसार, मेस स्टाफ ने खराब हो चुकी सब्जियों को अलग कर उन्हें फेंकने के लिए एक तरफ रखा था। इसी दौरान कुछ छात्र प्रतिनिधि मेस पहुंचे और उन सब्जियों की तस्वीरें ले लीं। तस्वीरें सामने आने के बाद मामला विश्वविद्यालय प्रशासन तक पहुंचा और तत्काल जांच शुरू कर दी गई।
प्रोफेसर आर.एल. जिंटा ने बताया कि छात्रों के स्वास्थ्य से किसी भी प्रकार का समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा। मामले को गंभीरता से लेते हुए दोनों मेस मैनेजरों को उनकी जिम्मेदारी से हटा दिया गया है और फिलहाल यह दायित्व छात्रावास की दो अन्य छात्राओं को सौंपा गया है। साथ ही हॉस्टल वार्डन को नियमित रूप से मेस और खाद्य सामग्री का निरीक्षण करने के निर्देश भी दिए गए हैं।
विश्वविद्यालय प्रशासन का कहना है कि भविष्य में भोजन की गुणवत्ता बनाए रखने के लिए निगरानी व्यवस्था और अधिक सख्त की जाएगी, ताकि छात्राओं को सुरक्षित और गुणवत्तापूर्ण भोजन उपलब्ध कराया जा सके।
