Home राज्य नई तकनीक AI Milk Purifier: हिमाचल के युवा का कमाल! अब घर पर दूध से यूरिया-डिटर्जेंट होंगे अलग, AI करेगा शुद्ध

नई तकनीक AI Milk Purifier: हिमाचल के युवा का कमाल! अब घर पर दूध से यूरिया-डिटर्जेंट होंगे अलग, AI करेगा शुद्ध

by Dainik Janvarta
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नई तकनीक: अब पानी की तरह घर पर होगा दूध शुद्ध! हिमाचल के युवा वैज्ञानिक ने तैयार की अनोखी तकनीक

क्या आपके घर आने वाले दूध में यूरिया, डिटर्जेंट या सिंथेटिक फैट मिला है? अब इसकी चिंता जल्द ही खत्म हो सकती है।
हिमाचल के एक युवा वैज्ञानिक ने ऐसा AI आधारित ‘लेक्टो प्योर’ डिवाइस विकसित किया है, जो कुछ ही मिनटों में दूध से मिलावटी और हानिकारक तत्वों को अलग कर सकता है।

शिमला निवासी और हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय (एचपीयू) से ऑर्गेनिक केमिस्ट्री में पीएचडी कर चुके सुमित राणा ने एक अभिनव AI आधारित मिल्क प्यूरीफायर तैयार किया है। इस डिवाइस का नाम ‘लेक्टो प्योर’ (Lacto Pure) रखा गया है, जो आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और मेम्ब्रेन फिल्ट्रेशन तकनीक की मदद से दूध की शुद्धता सुनिश्चित करने का दावा करता है।

इस नवाचार को भारतीय पेटेंट कार्यालय से डिजाइन और उत्पादन का पेटेंट मिल चुका है। सुमित राणा ने धर्मशाला निवासी जयदेव के साथ मिलकर मुख्यमंत्री स्टार्टअप योजना के तहत इस प्रोजेक्ट को एनआईटी हमीरपुर के इनक्यूबेशन सेंटर में पंजीकृत कराया। यहां से मिली दो लाख रुपये की इग्निशन ग्रांट के बाद इसका प्रोटोटाइप तैयार किया गया और शुरुआती परीक्षण भी सफलतापूर्वक पूरे किए गए।

ऐसे करेगा काम

डिवाइस में लगे AI सेंसर सबसे पहले दूध का रियल-टाइम विश्लेषण करेंगे। यदि दूध में यूरिया, डिटर्जेंट, सिंथेटिक फैट या अन्य मिलावटी तत्व पाए जाते हैं, तो इसका विशेष मेम्ब्रेन फिल्टर स्वतः सक्रिय हो जाएगा।

यह फिल्टर दूध के आवश्यक पोषक तत्वों को सुरक्षित रखते हुए हानिकारक और संदिग्ध तत्वों को अलग करने का काम करेगा। पूरी प्रक्रिया कुछ ही मिनटों में पूरी होने का दावा किया गया है, जिससे उपभोक्ताओं को अधिक सुरक्षित और शुद्ध दूध मिल सकेगा।

पीएचडी के दौरान आया था आइडिया

सुमित राणा के अनुसार, उन्होंने वर्ष 2021 में एचपीयू में पीएचडी के दौरान इस तकनीक पर काम शुरू किया था। बाद में एनआईटी हमीरपुर के तकनीकी सहयोग से इस विचार को वास्तविक उत्पाद का रूप दिया गया।

कीमत घटाकर 10 हजार रुपये तक लाने की तैयारी

फिलहाल इस डिवाइस के प्रोटोटाइप को तैयार करने में लगभग 35 हजार रुपये की लागत आई है। हालांकि, डेवलपर्स का कहना है कि बड़े पैमाने पर उत्पादन शुरू होने के बाद इसकी कीमत घटाकर करीब 10 हजार रुपये तक लाई जा सकती है, ताकि आम मध्यमवर्गीय परिवार भी इसे खरीद सकें।

घर और डेयरी, दोनों के लिए होगा उपयोगी

‘लेक्टो प्योर’ का छोटा मॉडल घरेलू उपयोग के लिए तैयार किया गया है, जो करीब 10 मिनट में एक लीटर दूध को शुद्ध करने की क्षमता रखता है। वहीं, बड़े डेयरी संयंत्रों के लिए हाई-कैपेसिटी फिल्ट्रेशन सिस्टम भी विकसित किए जा रहे हैं, जिनकी मदद से एक साथ सैकड़ों लीटर दूध को शुद्ध किया जा सकेगा।

यदि यह तकनीक व्यावसायिक स्तर पर सफल होती है, तो आने वाले समय में घरों से लेकर डेयरी उद्योग तक दूध की गुणवत्ता और खाद्य सुरक्षा के क्षेत्र में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है।

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