Hydropower Project: हिमाचल की सबसे बड़ी ऊर्जा परियोजनाओं में शामिल होगा 1500 मेगावाट का प्लांट, चंद्रभागा का पानी सुरंग से पहुंचेगा ज्यूरी
अगर सब कुछ योजना के अनुसार हुआ तो लाहौल-स्पीति की चंद्रभागा नदी का पानी 10 किलोमीटर लंबी सुरंग से होकर ज्यूरी पहुंचेगा और यहां से 1500 मेगावाट बिजली का उत्पादन होगा।
प्रदेश सरकार ने इस महत्वाकांक्षी हाइड्रो पावर परियोजना की तकनीकी प्रक्रिया तेज कर दी है और प्रारंभिक सर्वेक्षण के साथ मिट्टी की जांच भी शुरू हो गई है।
लाहौल-स्पीति जिले की जल संपदा का बेहतर उपयोग करने के उद्देश्य से प्रस्तावित 1500 मेगावाट क्षमता की हाइड्रो पावर परियोजना को धरातल पर उतारने की दिशा में प्रदेश सरकार ने महत्वपूर्ण कदम बढ़ा दिए हैं। इस परियोजना के तहत चंद्रभागा (भागा) नदी का पानी करीब 10 किलोमीटर लंबी सुरंग के माध्यम से चरड़ा पंचायत के ज्यूरी तक पहुंचाया जाएगा, जहां अत्याधुनिक पावर हाउस स्थापित कर बिजली का उत्पादन किया जाएगा।
प्रारंभिक सर्वेक्षण और तकनीकी प्रक्रिया शुरू
परियोजना की डिजाइन तैयार किए जाने से पहले प्रारंभिक सर्वेक्षण और तकनीकी जांच का कार्य शुरू हो चुका है। हाल ही में परियोजना से जुड़ी टीम ने ज्यूरी क्षेत्र के विभिन्न स्थानों से मिट्टी के नमूने एकत्र किए हैं। इन नमूनों को गुणवत्ता और भू-वैज्ञानिक परीक्षण के लिए नोएडा स्थित आधुनिक प्रयोगशाला भेजा गया है।
विशेषज्ञों की रिपोर्ट मिलने के बाद पावर हाउस, सुरंग और अन्य निर्माण कार्यों की अंतिम तकनीकी रूपरेखा तैयार की जाएगी।
बिजली उत्पादन के बाद फिर नदी में छोड़ा जाएगा पानी
योजना के अनुसार चंद्रभागा नदी का पानी सुरंग के माध्यम से ज्यूरी तक लाया जाएगा। यहां बिजली उत्पादन होने के बाद पानी को तिंदी क्षेत्र में दोबारा चंद्रभागा नदी में छोड़ दिया जाएगा, ताकि नदी के प्राकृतिक प्रवाह का संतुलन बना रहे।
स्वच्छ ऊर्जा और रोजगार को मिलेगा बढ़ावा
इस हाइड्रो पावर परियोजना के शुरू होने से हिमाचल प्रदेश की विद्युत उत्पादन क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि होने की संभावना है। साथ ही स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन को बढ़ावा मिलेगा और स्थानीय लोगों के लिए रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे। आधुनिक तकनीक के इस्तेमाल से सुरंग और पावर हाउस का निर्माण इस तरह किया जाएगा कि पर्यावरणीय प्रभाव न्यूनतम रहे।
एसडीएम ने क्या कहा?
चुराह के एसडीएम राजेश जरयाल ने बताया कि सीडब्ल्यूसी स्कीम के तहत चरड़ा के ज्यूरी में सुरंग निर्माण के लिए मिट्टी के नमूने लेकर जांच के लिए प्रयोगशाला भेजे गए हैं। उन्होंने कहा कि तिंदी क्षेत्र से भागा नदी का पानी यहां लाकर बिजली उत्पादन करने की योजना पर तकनीकी प्रक्रिया आगे बढ़ रही है।
