998 दिनों से जारी आंदोलन उग्र, सीएम आवास कूच के दौरान पुलिस ने रोके दृष्टिबाधित प्रदर्शनकारी
शिमला। करीब 998 दिनों से अपनी मांगों को लेकर संघर्ष कर रहे दृष्टिबाधित युवाओं का धैर्य अब टूटता नजर आ रहा है। बुधवार को जब उन्होंने मुख्यमंत्री आवास की ओर कूच किया तो पुलिस ने बीच रास्ते में रोक दिया। इसके बाद प्रदर्शनकारियों ने सड़क पर ही धरना देकर जोरदार नारेबाजी शुरू कर दी, जिससे राजधानी शिमला में काफी देर तक माहौल गर्म रहा।
हिमाचल प्रदेश में रोजगार और आरक्षण से जुड़ी लंबित मांगों को लेकर आंदोलन कर रहे दृष्टिबाधित युवाओं ने बुधवार को अपनी आवाज बुलंद करते हुए मुख्यमंत्री आवास ओकओवर की ओर मार्च निकाला। हालांकि सुरक्षा व्यवस्था के मद्देनजर पुलिस ने छोटा शिमला के पास ही प्रदर्शनकारियों को आगे बढ़ने से रोक दिया।
इस दौरान पुलिस और आंदोलनकारियों के बीच कुछ देर तक बहस भी हुई, जिसके बाद सभी प्रदर्शनकारी सड़क पर बैठ गए और धरना शुरू कर दिया। प्रदर्शन के कारण कुछ समय के लिए यातायात भी प्रभावित रहा और मौके पर अतिरिक्त पुलिस बल तैनात करना पड़ा।
दृष्टिबाधित जन संगठन के सचिव राजेश ठाकुर ने बताया कि संगठन पिछले 998 दिनों से शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांगों को लेकर आंदोलन कर रहा है। इस दौरान कई बार सरकार और प्रशासन को ज्ञापन सौंपे गए, अधिकारियों के साथ बैठकों का दौर भी चला, लेकिन अब तक कोई ठोस समाधान नहीं निकला।
संगठन का आरोप है कि विभिन्न सरकारी विभागों में दृष्टिबाधितों के लिए आरक्षित लगभग 1100 बैकलॉग पद वर्षों से खाली पड़े हैं। इन पदों पर भर्ती नहीं होने के कारण बड़ी संख्या में योग्य दृष्टिबाधित युवा रोजगार से वंचित हैं। प्रदर्शनकारियों ने मांग की कि सभी विभागों में रिक्त बैकलॉग पदों की विभागवार सूची सार्वजनिक की जाए और भर्ती प्रक्रिया जल्द शुरू की जाए।
इसके अलावा संगठन ने दिव्यांगजनों के लिए आरक्षण संबंधी प्रावधानों को प्रभावी ढंग से लागू करने, लंबित मामलों का शीघ्र निपटारा करने और दिव्यांग हितों से जुड़े फैसलों को समयबद्ध तरीके से लागू करने की मांग भी उठाई।
राजेश ठाकुर ने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने जल्द सकारात्मक कदम नहीं उठाए तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। उन्होंने कहा कि भविष्य में चक्का जाम, मुख्यमंत्री आवास घेराव और प्रदेशव्यापी विरोध कार्यक्रम भी आयोजित किए जाएंगे।
