रेणुका जी विधानसभा क्षेत्र को स्वास्थ्य सेवाओं की बड़ी सौगात, 7 डॉक्टरों की नियुक्ति के आदेश जारी; हरिपुरधार में एक्स-रे और संगड़ाह में अल्ट्रासाउंड मशीन स्वीकृत
रेणुका जी विधानसभा क्षेत्र के हजारों लोगों के लिए राहत भरी खबर है। वर्षों से डॉक्टरों की कमी और जरूरी जांच सुविधाओं के अभाव से जूझ रहे क्षेत्र को अब बड़ी स्वास्थ्य सौगात मिली है। प्रदेश सरकार ने एक साथ सात डॉक्टरों की नियुक्ति के आदेश जारी करने के साथ दो महत्वपूर्ण मशीनों को भी मंजूरी दे दी है।
नाहन/संगड़ाह। सिरमौर जिले के रेणुका जी विधानसभा क्षेत्र में स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ करने की दिशा में प्रदेश सरकार ने अहम कदम उठाया है। क्षेत्र के विभिन्न स्वास्थ्य संस्थानों में चिकित्सकों की कमी को दूर करने के लिए सात डॉक्टरों की नियुक्ति के आदेश जारी किए गए हैं। साथ ही सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) हरिपुरधार के लिए एक्स-रे मशीन और सीएचसी संगड़ाह के लिए अल्ट्रासाउंड मशीन भी स्वीकृत की गई है।
जारी आदेशों के अनुसार सीएचसी हरिपुरधार, सीएचसी संगड़ाह, पीएचसी गताधार, टीकरी डसाकना, भराड़ी, चोकर और लाना चेता में एक-एक चिकित्सक की नियुक्ति की जाएगी। इससे लंबे समय से डॉक्टरों की कमी का सामना कर रहे इन स्वास्थ्य संस्थानों में चिकित्सा सेवाएं बेहतर होने की उम्मीद है।
बताया जा रहा है कि विधायक एवं प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष विनय कुमार के प्रयासों से इन नियुक्तियों और स्वास्थ्य सुविधाओं को मंजूरी मिली है। नई नियुक्तियों के बाद क्षेत्र के लोगों को प्राथमिक और विशेषज्ञ चिकित्सा सेवाएं स्थानीय स्तर पर उपलब्ध हो सकेंगी।
हरिपुरधार में एक्स-रे मशीन स्थापित होने से हरिपुरधार-मेहल क्षेत्र की आठ पंचायतों, कुपवी-चौपाल की 13 पंचायतों, शिलाई के लादी क्षेत्र की आठ पंचायतों तथा नौहराधार और बढ़ौल क्षेत्र की 30 से 35 पंचायतों के हजारों लोगों को सीधा लाभ मिलेगा। वहीं, सीएचसी संगड़ाह में अल्ट्रासाउंड मशीन शुरू होने से विशेष रूप से गर्भवती महिलाओं, बुजुर्गों और अन्य मरीजों को समय पर जांच की सुविधा मिलेगी और उन्हें उपचार के लिए दूसरे शहरों का रुख नहीं करना पड़ेगा।
पूर्व बीडीसी उपाध्यक्ष दिलीप चौहान सहित अन्य कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने इस फैसले का स्वागत करते हुए मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू और विधायक विनय कुमार का आभार जताया। उनका कहना है कि डॉक्टरों की तैनाती और आधुनिक चिकित्सा उपकरणों की उपलब्धता से ग्रामीण क्षेत्रों की स्वास्थ्य व्यवस्था और मजबूत होगी, जिससे लोगों का समय और इलाज पर होने वाला अतिरिक्त खर्च भी बचेगा।
