कालाअंब में पहली ही बारिश ने खोली तैयारियों की पोल, सड़कें बनीं तालाब; ईएसआईसी अस्पताल का रास्ता फिर जलमग्न
कालाअंब (सिरमौर)। मानसून की पहली ही तेज बारिश ने कालाअंब में जलभराव की पुरानी समस्या को एक बार फिर उजागर कर दिया। सिर्फ पांच घंटे की बरसात में कई सड़कें तालाब में तब्दील हो गईं और ईएसआईसी अस्पताल जाने वाला मुख्य मार्ग पूरी तरह पानी में डूब गया। हालात ऐसे बने कि मरीजों, स्थानीय लोगों और राहगीरों को कीचड़ और जलभराव के बीच जान जोखिम में डालकर आवाजाही करनी पड़ी।
बुधवार को हुई बारिश ने आपदा प्रबंधन और प्रशासन की तैयारियों की भी पोल खोलकर रख दी। चार दिनों की उमस भरी गर्मी के बाद हुई बारिश से लोगों को राहत तो मिली, लेकिन जलभराव ने मुश्किलें कई गुना बढ़ा दीं। क्षेत्र का नेशनल हाईवे 07 पानी से लबालब भर गया और कच्चे रास्तों पर जगह-जगह कीचड़ फैल गया।
सबसे गंभीर स्थिति कालाअंब-त्रिलोकपुर सड़क और ईएसआईसी अस्पताल जाने वाले मार्ग पर देखने को मिली, जहां पानी की निकासी की समुचित व्यवस्था न होने के कारण सड़क फिर से तालाब बन गई। स्थानीय लोगों का कहना है कि यह समस्या नई नहीं है। पिछले वर्ष भी बरसात के दौरान इसी सड़क के करीब 200 फीट हिस्से में लगभग दो फीट तक पानी भर गया था। उस समय संबंधित विभाग ने निरीक्षण कर स्थायी समाधान का भरोसा दिया था, लेकिन एक साल बाद भी हालात जस के तस बने हुए हैं।
स्थानीय निवासी रोशन लाल, राम शरण, तेजपाल और गोविन्द ने बताया कि जलभराव के कारण ग्रामीणों के साथ-साथ ईएसआईसी अस्पताल आने-जाने वाले मरीजों को सबसे अधिक परेशानी उठानी पड़ रही है। उन्होंने जिला प्रशासन से जल्द स्थायी जल निकासी व्यवस्था सुनिश्चित करने की मांग की है।
जानकारी के अनुसार, पहले इस क्षेत्र का बरसाती पानी हरियाणा की ओर निकलता था, लेकिन एक भट्ठा संचालक द्वारा अपनी निजी भूमि से पानी की निकासी रोक देने के बाद समस्या और गंभीर हो गई। इसके बाद हिमाचल प्रदेश औद्योगिक विकास प्राधिकरण (एचपीआईडीसी) के अधिकारियों ने निरीक्षण कर सड़क किनारे ड्रेन बनाने का प्रस्ताव तैयार कर बजट स्वीकृति के लिए भेजा था। हालांकि एक वर्ष बीत जाने के बावजूद बजट स्वीकृत नहीं हो पाया, जिसके कारण जलभराव की समस्या आज भी बनी हुई है।
इसके अलावा कालाअंब-त्रिलोकपुर सड़क पर साबू सरिया उद्योग से रुचिरा पेपर मिल तक का हिस्सा भी लंबे समय तक जलमग्न रहा। सड़क पर भरे पानी के कारण वाहन चालकों और पैदल राहगीरों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा। पहली ही बारिश में बदहाल व्यवस्था सामने आने से लोगों में सरकार और प्रशासन के प्रति नाराजगी भी साफ दिखाई दी।
