शिमला मनीषा मित्तल हत्याकांड: CCTV, मनी ट्रेल और डिजिटल सबूतों ने खोली साजिश की परतें, 18 दिन में पुलिस ने सुलझाई मर्डर मिस्ट्री
दिनदहाड़े स्कूल के बाहर हुई गोलियों की तड़तड़ाहट ने पूरे हिमाचल को झकझोर दिया था। चेहरा ढके शूटर, फरार मास्टरमाइंड और करोड़ों की संपत्ति का विवाद… लेकिन पुलिस ने सीसीटीवी, बैंक ट्रांजैक्शन और तकनीकी साक्ष्यों की ऐसी कड़ियां जोड़ीं कि 18 दिन के भीतर इस हाई-प्रोफाइल हत्याकांड की पूरी साजिश सामने आ गई।
शिमला। संजौली स्थित सरस्वती पैराडाइज इंटरनेशनल स्कूल की संचालिका मनीषा मित्तल की दिनदहाड़े गोली मारकर की गई हत्या के मामले में शिमला पुलिस ने 18 दिनों के भीतर हत्या की गुत्थी सुलझाने का दावा किया है। पुलिस के अनुसार, सीसीटीवी फुटेज, डिजिटल एक्सेस लॉग, बैंक ट्रांजैक्शन, फोरेंसिक जांच और तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर पूरी साजिश का खुलासा हुआ है। शुरुआती जांच में जिस तरह से हत्या को अंजाम दिया गया, उससे पुलिस को साफ संकेत मिल गया था कि वारदात में पेशेवर शूटर शामिल हैं।
हत्या के तुरंत बाद पुलिस ने विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया और अलग-अलग टीमें हरियाणा व पंजाब रवाना की गईं। घटनास्थल से जुटाए गए फोरेंसिक साक्ष्यों और तकनीकी विश्लेषण की मदद से पुलिस ने महज 39 घंटे के भीतर हरियाणा के रोहतक से दोनों कथित शूटरों को गिरफ्तार कर लिया। उनके कब्जे से हत्या में इस्तेमाल किए गए दो पिस्तौल और वारदात में प्रयुक्त वाहन भी बरामद किया गया।
जांच के दौरान पुलिस का संदेह मनीषा मित्तल के भाई हिमांक मित्तल की ओर भी गया। दोनों के बीच लंबे समय से संपत्ति विवाद चल रहा था और मनीषा पहले ही सोशल मीडिया पर वीडियो साझा कर अपनी जान को भाई से खतरा होने की आशंका जता चुकी थीं। हालांकि उस समय पुलिस के पास ठोस सबूत नहीं थे।
पुलिस जांच में सामने आया कि स्कूल के सीसीटीवी सिस्टम का एक्सेस हिमांक के पास था। डिजिटल एक्सेस लॉग की जांच में यह भी पता चला कि सिस्टम को किन-किन डिवाइसों और आईपी एड्रेस से एक्सेस किया गया था।
इसी दौरान बैंक खातों की जांच में खुलासा हुआ कि हत्या से पहले हिमांक ने कथित तौर पर अपने साथी गोविंद के खाते में 8.50 लाख रुपये ट्रांसफर किए थे। वहीं गोविंद ने आगे एक कथित शूटर के खाते में 20 हजार रुपये भेजे थे। पुलिस का दावा है कि यही मनी ट्रेल पूरे षड्यंत्र को जोड़ने में अहम कड़ी साबित हुई।
जांच में यह भी सामने आया कि आरोपियों ने पहचान छिपाने के लिए हरियाणा नंबर की गाड़ी पर हिमाचल का फर्जी पंजीकरण नंबर लगाया था। पुलिस ने वाहन की जानकारी जुटाई तो उसकी कड़ी गोविंद तक पहुंची, जो वारदात के बाद थाईलैंड चला गया था। बाद में उसे भी गिरफ्तार कर लिया गया।
पुलिस के अनुसार, वारदात वाले दिन दोनों शूटर पहले से स्कूल के आसपास मौजूद थे और मनीषा की गतिविधियों पर नजर रख रहे थे। जैसे ही वह स्कूल से बाहर निकलीं, एक आरोपी ने पीछे से बेहद करीब जाकर सिर पर गोली मारी। मनीषा के गिरने के बाद दूसरे आरोपी ने भी उन पर गोलियां चलाईं, ताकि उनके बचने की कोई संभावना न रहे।
एसएसपी गौरव सिंह ने बताया कि मामले की जांच में हर पहलू की गहन पड़ताल की गई। एसआईटी, फोरेंसिक टीम और तकनीकी विशेषज्ञों की मदद से हत्या की पूरी साजिश का खुलासा किया गया। इस जांच में पंजाब और हरियाणा पुलिस का भी सहयोग लिया गया।
घटनाक्रम एक नजर में
13 जून: संजौली स्थित स्कूल के बाहर मनीषा मित्तल की गोली मारकर हत्या।
15 जून: रोहतक से दोनों कथित शूटर गिरफ्तार।
28 जून: आरोपी गोविंद की गिरफ्तारी।
29 जून: हिमांक मित्तल गिरफ्तार।
30 जून: पुलिस ने हत्या की साजिश का खुलासा करने का दावा किया।
पुलिस का कहना है कि अब तक की जांच में सामने आए साक्ष्यों के अनुसार संपत्ति विवाद इस हत्याकांड की मुख्य वजह रहा। मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई जारी है।
