कुल्लू अस्पताल में मरीज की मौत पर बड़ी कार्रवाई, स्त्री रोग विशेषज्ञ निलंबित, सरकार ने बैठाई जांच
कुल्लू: क्षेत्रीय अस्पताल कुल्लू में ऑपरेशन के बाद महिला मरीज की मौत का मामला अब तूल पकड़ चुका है। परिजनों के विरोध और लगातार हो रहे प्रदर्शनों के बीच प्रदेश सरकार ने बड़ी कार्रवाई करते हुए संबंधित स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। साथ ही पूरे मामले की निष्पक्ष जांच के लिए विभागीय जांच और जांच कमेटी गठित कर दी गई है।
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग द्वारा मंगलवार को जारी आदेशों के अनुसार, क्षेत्रीय अस्पताल कुल्लू में कार्यरत स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ डॉ. अनु देवी को तत्काल प्रभाव से निलंबित किया गया है। विभाग ने उनके खिलाफ विभागीय जांच शुरू कर दी है। जांच में यह पता लगाया जाएगा कि मरीज के उपचार और ऑपरेशन के दौरान किसी प्रकार की चिकित्सीय लापरवाही हुई थी या नहीं। साथ ही मामले से जुड़ी अन्य परिस्थितियों की भी विस्तार से जांच की जाएगी।
सरकार की ओर से जारी आदेशों में कहा गया है कि स्वास्थ्य सेवाओं के निदेशक की रिपोर्ट के आधार पर यह कार्रवाई की गई है। रिपोर्ट के अनुसार, 21 जून 2026 को डॉ. अनु देवी ने क्षेत्रीय अस्पताल कुल्लू में एक महिला मरीज का ऑपरेशन किया था। ऑपरेशन के बाद मरीज की मौत हो गई, जिसके बाद पूरे मामले ने गंभीर रूप ले लिया।
निलंबन की कार्रवाई केंद्रीय सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियम, 1965 के तहत की गई है। निलंबन अवधि के दौरान डॉ. अनु देवी का मुख्यालय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण निदेशालय, शिमला रहेगा। उन्हें सक्षम प्राधिकारी की पूर्व अनुमति के बिना मुख्यालय छोड़ने की अनुमति नहीं होगी।
उधर, स्वास्थ्य मंत्री धनीराम शांडिल ने कहा कि सरकार इस मामले को गंभीरता से ले रही है। उन्होंने बताया कि पूरे घटनाक्रम की जांच के लिए कमेटी गठित कर दी गई है और जांच रिपोर्ट के आधार पर जो भी दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ नियमानुसार कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
इधर, महिला की मौत के बाद कुल्लू में लोगों का आक्रोश लगातार बढ़ता जा रहा है। सोमवार को सैकड़ों लोगों ने मशाल जुलूस निकालकर स्वास्थ्य विभाग और सरकार के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया। समाजसेवी बंटी सराजी के नेतृत्व में निकले प्रदर्शनकारियों ने ढालपुर चौक से लेकर क्षेत्रीय अस्पताल तक रैली निकाली, स्वास्थ्य विभाग का पुतला फूंका और मृतक महिला को न्याय दिलाने की मांग की।
प्रदर्शन के दौरान बड़ी संख्या में लोग अस्पताल परिसर तक पहुंचे और नारेबाजी की। बाद में कुछ प्रदर्शनकारी आमरण अनशन पर भी बैठ गए। मंगलवार को भी विरोध जारी रहा। अस्पताल प्रबंधन द्वारा गठित जांच कमेटी की 47 पन्नों की रिपोर्ट लोगों के सामने रखी गई, लेकिन प्रदर्शनकारी उससे संतुष्ट नहीं हुए। उनका आरोप है कि रिपोर्ट में अधिकांश निष्कर्ष संबंधित डॉक्टर के पक्ष में हैं, इसलिए वे स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच की मांग पर अड़े हुए हैं।
