Sirmaur News: मांगें पूरी नहीं हुईं तो रेणुका बांध विस्थापित छेड़ेंगे बड़ा आंदोलन, बैठक में सरकार को चेतावनी
रेणुका बांध परियोजना से प्रभावित परिवारों ने अपनी लंबित मांगों को लेकर सरकार और संबंधित विभागों को कड़ा संदेश दिया है। विस्थापितों ने साफ चेतावनी दी है कि यदि जल्द समाधान नहीं हुआ तो आने वाले दिनों में बड़ा आंदोलन शुरू किया जाएगा।
सालों से मुआवजा, पुनर्वास और लंबित मामलों के समाधान की प्रतीक्षा कर रहे प्रभावित परिवार अब आर-पार की लड़ाई के मूड में दिखाई दे रहे हैं।
ददाहू (सिरमौर)। रेणुका बांध विस्थापित संघर्ष समिति की खैरी जोन की बैठक सोमवार को खैरी स्थित अंटू बाग में आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता समिति के संस्थापक सदस्य विनोद ठाकुर और सलाहकार पूर्ण शर्मा ने की। बैठक में करीब 100 लोगों ने भाग लिया और विस्थापितों से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की।
बैठक में हिमालय नीति अभियान के संयोजक गुमान सिंह और विकास विशेष रूप से उपस्थित रहे। गुमान सिंह ने कहा कि रेणुका बांध परियोजना का कार्य अभी तत्काल शुरू होना आसान नहीं है, क्योंकि परियोजना को अभी पर्यावरण मंत्रालय से आवश्यक मंजूरियां प्राप्त नहीं हुई हैं। उन्होंने प्रभावित परिवारों से संगठित और एकजुट रहने का आह्वान करते हुए कहा कि सामूहिक प्रयासों से ही उनकी मांगों को मजबूती से उठाया जा सकता है।
बैठक के दौरान गृहविहीन और भूमिहीन परिवारों के पुनर्वास का मुद्दा प्रमुखता से उठाया गया। इसके अलावा उन प्रभावितों की समस्याओं पर भी चर्चा हुई, जिन्होंने परियोजना के प्रथम चरण में अपनी भूमि की रजिस्ट्री एचपीसीएल के नाम करवाई थी।
समिति के पदाधिकारियों ने बताया कि उस समय प्रभावितों को प्रति बीघा 50 हजार रुपये की दर से मुआवजा दिया गया था। साथ ही यह आश्वासन भी दिया गया था कि भविष्य में भूमि की कीमत बढ़ने पर अंतर राशि का भुगतान किया जाएगा, लेकिन आज तक प्रभावित परिवारों को यह राशि नहीं मिल पाई है।
बैठक में इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाने और संबंधित विभागों के समक्ष मजबूती से रखने का निर्णय लिया गया। इसके साथ ही खैरी जोन की नई कार्यकारिणी का भी गठन किया गया। नरेंद्र को प्रधान, राघवानंद को उपप्रधान, अरुण शर्मा को महासचिव, रूपलाल और सरताज को सह सचिव तथा भानु प्रताप को कोषाध्यक्ष चुना गया।
बैठक के अंत में समिति ने स्पष्ट किया कि यदि विस्थापितों की लंबित मांगों का जल्द समाधान नहीं किया गया तो प्रभावित परिवार व्यापक आंदोलन का रास्ता अपनाने को मजबूर होंगे। इस दौरान समिति के प्रेस सचिव योगी ठाकुर सहित कई अन्य सदस्य भी मौजूद रहे।
