पांवटा नगर परिषद में अध्यक्ष-उपाध्यक्ष चुनाव पर हाईकोर्ट सख्त, सरकार से एक हफ्ते में मांगा जवाब
शिमला/पांवटा साहिब। नगर परिषद पांवटा साहिब में अध्यक्ष और उपाध्यक्ष के चुनाव में लगातार हो रही देरी अब सरकार के लिए मुश्किलें बढ़ा सकती है। लगभग डेढ़ महीने बाद भी पहली बैठक और चुनाव प्रक्रिया पूरी नहीं होने पर हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। अदालत ने राज्य सरकार, संबंधित अधिकारियों और चुनाव आयोग से एक सप्ताह के भीतर जवाब तलब किया है।
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट की खंडपीठ ने नगर परिषद पांवटा साहिब के अध्यक्ष और उपाध्यक्ष के चुनाव में हुई देरी को गंभीरता से लेते हुए राज्य सरकार को नोटिस जारी किया है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि संबंधित एसडीएम और राज्य चुनाव आयोग यह बताएं कि उन्होंने अपने कानूनी दायित्वों का निर्वहन किस प्रकार किया।
न्यायमूर्ति विवेक सिंह ठाकुर और न्यायमूर्ति रंजन शर्मा की खंडपीठ ने यह आदेश नगर परिषद पांवटा साहिब के निर्वाचित पार्षद कुलदीप चौधरी और अन्य की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई के दौरान पारित किए। मामले की अगली सुनवाई 6 जुलाई को निर्धारित की गई है।
याचिकाकर्ताओं ने अदालत को बताया कि नगर परिषद पांवटा साहिब के लिए 17 मई को मतदान संपन्न हुआ था और उसी दिन मतगणना के बाद परिणाम भी घोषित कर दिए गए थे। इसके बाद 23 मई को राज्य चुनाव आयोग ने हिमाचल प्रदेश नगर पालिका अधिनियम, 1994 की धारा 27(2) और नगर पालिका चुनाव नियम, 2015 के नियम 80 के तहत निर्वाचित सदस्यों की अधिसूचना भी जारी कर दी थी।
याचिका में कहा गया है कि सभी कानूनी औपचारिकताएं पूरी होने के बावजूद नगर परिषद की पहली बैठक आयोजित नहीं की गई और न ही अध्यक्ष तथा उपाध्यक्ष के चुनाव करवाए गए। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि चुनाव प्रक्रिया पूरी कराने में किसी प्रकार की कानूनी बाधा मौजूद नहीं थी।
दस्तावेजों के अनुसार, राज्य सरकार ने 27 मई को सभी उपायुक्तों को पत्र जारी कर नगर निकायों की पहली बैठक बुलाने और नवनिर्वाचित सदस्यों को शपथ दिलाने के निर्देश दिए थे। इसके बाद सिरमौर के उपायुक्त ने 29 मई को आदेश जारी कर यह जिम्मेदारी एसडीएम पांवटा साहिब को सौंपी थी।
याचिकाकर्ताओं ने अदालत को यह भी बताया कि चुनाव के पीठासीन अधिकारी ने 2 जून और 9 जून को पहली बैठक के लिए नोटिस जारी किए थे। बाद में 12 जून को एक शुद्धिपत्र जारी किया गया, लेकिन बैठक की तिथियों में बदलाव करते हुए अंततः इसे अगले आदेश तक स्थगित कर दिया गया।
अब हाईकोर्ट ने सरकार और संबंधित अधिकारियों से एक सप्ताह के भीतर विस्तृत रिपोर्ट दाखिल करने को कहा है। अदालत के इस सख्त रुख के बाद नगर परिषद पांवटा साहिब में अध्यक्ष और उपाध्यक्ष के चुनाव को लेकर नई हलचल तेज हो गई है।
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