212 करोड़ जारी होते ही कर्मचारियों और पेंशनरों को बड़ी राहत, मेडिकल बिलों के भुगतान में आई तेजी
लंबे समय से चिकित्सा प्रतिपूर्ति के भुगतान का इंतजार कर रहे हजारों कर्मचारियों और पेंशनरों के लिए राहत भरी खबर है।
हिमाचल सरकार ने लंबित मेडिकल दावों के निपटारे के लिए 212 करोड़ रुपये जारी कर दिए हैं, जिससे वर्षों से अटकी भुगतान प्रक्रिया में तेजी आने की उम्मीद बढ़ गई है।
शिमला। हिमाचल प्रदेश सरकार ने कर्मचारियों और पेंशनरों के लंबित चिकित्सा प्रतिपूर्ति दावों के भुगतान के लिए बड़ा कदम उठाया है। वित्त वर्ष 2026-27 के दौरान 27 जून तक सरकार ने कुल 212 करोड़ रुपये जारी किए हैं, जिससे हजारों लाभार्थियों को राहत मिलने की उम्मीद है।
जारी की गई राशि में से 131.03 करोड़ रुपये पेंशनरों के चिकित्सा प्रतिपूर्ति दावों के निपटारे के लिए आवंटित किए गए हैं, जबकि 80.97 करोड़ रुपये सरकारी कर्मचारियों के लंबित मेडिकल बिलों के भुगतान के लिए दिए गए हैं। वित्त विभाग ने संबंधित विभागों और अधिकारियों को भुगतान प्रक्रिया में तेजी लाने के निर्देश भी जारी किए हैं।
सरकार ने स्पष्ट किया है कि वित्तीय अनुशासन और संसाधनों के बेहतर प्रबंधन के माध्यम से लंबे समय से लंबित वित्तीय देनदारियों का चरणबद्ध तरीके से समाधान किया जा रहा है। कर्मचारी और पेंशनर अपने दावों की स्थिति जानने के लिए संबंधित आहरण एवं वितरण अधिकारी (डीडीओ) से संपर्क कर सकते हैं।
इसके अलावा राज्य सरकार ने वर्ष 2016 के बाद सेवानिवृत्त अथवा दिवंगत चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों और उनके आश्रितों के लंबित एरियर के भुगतान की प्रक्रिया भी आगे बढ़ाई है। जिन पेंशनरों की मूल पेंशन 25 हजार रुपये प्रतिमाह तथा पारिवारिक पेंशन 15 हजार रुपये प्रतिमाह तक है, उन्हें इसका लाभ दिया जा रहा है।
सरकार एक जनवरी 2016 से पहले सेवानिवृत्त पेंशनभोगियों और पारिवारिक पेंशनरों के संशोधित पेंशन एरियर के भुगतान पर भी काम कर रही है। इससे बड़ी संख्या में सेवानिवृत्त कर्मचारियों को राहत मिलने की संभावना है।
मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने कहा कि राज्य सरकार कर्मचारियों और पेंशनरों के हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है। उन्होंने कहा कि पुरानी पेंशन योजना की बहाली सहित कई महत्वपूर्ण फैसले इसी दिशा में उठाए गए हैं। मुख्यमंत्री के अनुसार प्रदेश की आर्थिक स्थिति में सुधार के साथ लंबित वित्तीय लाभों का भुगतान भी सुनिश्चित किया जा रहा है, ताकि कर्मचारियों और पेंशनरों का विश्वास मजबूत हो सके।
