TET Big Update: 2010 से पहले नियुक्त शिक्षकों को बड़ी राहत, NCTE ने कोर्ट में किया साफ — नहीं देनी होगी TET परीक्षा
शिमला। वर्षों से शिक्षक समुदाय के बीच बना हुआ टेट (TET) को लेकर संशय अब काफी हद तक दूर हो गया है। राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद (NCTE) ने न्यायालय में दायर अपने शपथपत्र में स्पष्ट कर दिया है कि 23 अगस्त 2010 से पहले नियुक्त शिक्षकों के लिए टीईटी अनिवार्य नहीं होगी। इस स्पष्टीकरण से देशभर के हजारों शिक्षकों को बड़ी राहत मिली है।
लंबे समय से यह सवाल उठ रहा था कि क्या वर्ष 2010 से पहले नियुक्त शिक्षकों को भी नौकरी जारी रखने के लिए टीईटी परीक्षा उत्तीर्ण करनी होगी। अब एनसीटीई के स्पष्ट रुख के बाद इस भ्रम की स्थिति खत्म होती नजर आ रही है।
शपथपत्र के अनुसार, 3 सितंबर 2001 से पहले नियुक्त शिक्षकों को टीईटी से पूरी तरह छूट प्राप्त रहेगी। केवल टीईटी उत्तीर्ण न होने के आधार पर उनकी नियुक्ति या सेवा पर कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा। परिषद ने स्पष्ट किया है कि बाद में बनाए गए नियमों को पूर्व प्रभाव से लागू नहीं किया जा सकता।
इसके अलावा, 3 सितंबर 2001 से लेकर 23 अगस्त 2010 के बीच नियुक्त शिक्षकों पर भी टीईटी की अनिवार्यता लागू नहीं होगी। एनसीटीई का कहना है कि उस समय टीईटी व्यवस्था अस्तित्व में ही नहीं थी, इसलिए उस अवधि के दौरान संबंधित नियमों के तहत हुई नियुक्तियां पूरी तरह वैध मानी जाएंगी।
शिक्षा क्षेत्र के जानकारों का मानना है कि नियुक्ति के समय जो नियम प्रभावी थे, उसी आधार पर नियुक्तियों की वैधता तय की जानी चाहिए। बाद में लागू की गई पात्रता परीक्षाओं को पुराने नियुक्त शिक्षकों पर लागू करना न्यायसंगत नहीं माना जा सकता।
गौरतलब है कि 23 अगस्त 2010 को एनसीटीई ने अधिसूचना जारी कर प्राथमिक और उच्च प्राथमिक स्तर के शिक्षकों की नियुक्ति के लिए टीईटी को आवश्यक पात्रता घोषित किया था। इसके बाद नियुक्त होने वाले शिक्षकों के लिए टीईटी उत्तीर्ण करना अनिवार्य माना गया।
एनसीटीई के इस स्पष्ट रुख से हिमाचल प्रदेश सहित देशभर के उन हजारों शिक्षकों को राहत मिलने की उम्मीद है, जो लंबे समय से अपनी सेवा सुरक्षा और टीईटी की अनिवार्यता को लेकर असमंजस की स्थिति में थे।
