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हिमाचल में 9,042 किसान क्रेडिट कार्ड आवेदन खारिज, SBI ने सबसे ज्यादा किए रिजेक्ट
“किसानों को हर खेत तक कर्ज पहुंचाने का लक्ष्य, लेकिन हजारों आवेदन बैंकों ने कर दिए खारिज।”
“हिमाचल में 9 हजार से ज्यादा किसान क्रेडिट कार्ड आवेदन रद्द होने से व्यवस्था पर उठे सवाल।”
शिमला। हिमाचल प्रदेश में किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) योजना के तहत हजारों किसानों को झटका लगा है। राज्य में विभिन्न बैंकों ने 9,042 किसानों के किसान क्रेडिट कार्ड आवेदन रद्द कर दिए हैं। यह खुलासा राज्यस्तरीय बैंकर्स कमेटी (एसएलबीसी) की 180वीं बैठक में प्रस्तुत रिपोर्ट में हुआ। बैठक में राज्य सरकार के सचिव अभिषेक जैन भी मौजूद रहे।
रिपोर्ट के अनुसार, कई किसान अपनी जमीन गिरवी रखने और आवश्यक दस्तावेज देने के लिए तैयार थे, लेकिन बैंकों की औपचारिकताएं पूरी नहीं कर पाने के कारण उनके आवेदन अस्वीकार कर दिए गए। इससे किसानों के बीच नाराजगी बढ़ी है।
सबसे ज्यादा आवेदन भारतीय स्टेट बैंक ने खारिज किए हैं। बैंक को 94,043 नए आवेदन प्राप्त हुए, जिनमें से 4,797 आवेदन रद्द कर दिए गए। वहीं पंजाब नेशनल बैंक के पास 1,14,129 आवेदन आए, जिनमें से 2,554 आवेदन अस्वीकृत किए गए।
यूको बैंक ने 566, बैंक ऑफ बड़ौदा ने 313, हिमाचल प्रदेश राज्य सहकारी बैंक ने 303, सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया ने 205, यूनियन बैंक ने 138 और इंडियन बैंक ने 124 आवेदन रद्द किए। दूसरी ओर, हिमाचल प्रदेश ग्रामीण बैंक ने 72,718 आवेदनों में से एक भी आवेदन खारिज नहीं किया, जो अन्य बैंकों के लिए एक उदाहरण माना जा रहा है।
पशुपालकों और मत्स्यपालकों को भी किसान क्रेडिट कार्ड योजना से जोड़ने के निर्देश हैं। इसके बावजूद पशुपालकों के 33,818 आवेदनों में से 3,555 आवेदन और मत्स्यपालकों के 1,190 आवेदनों में से 284 आवेदन अस्वीकृत कर दिए गए।
वर्ष 2020 से मार्च 2026 तक चलाए गए विशेष अभियान के दौरान प्रदेश में कुल 3,99,271 किसान क्रेडिट कार्ड जारी किए गए हैं। वर्तमान में पीएम किसान पोर्टल पर हिमाचल के 8.48 लाख किसान पंजीकृत हैं, जिनमें से 6,25,110 किसान केसीसी धारक हैं।
राज्यस्तरीय बैंकर्स कमेटी के संयोजक कमल कुमार शर्मा ने कहा कि सभी बैंकों की आवेदन स्वीकार करने और अस्वीकार करने की अपनी अलग प्रक्रिया होती है। पूरे मामले की समीक्षा के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो पाएगी।
वहीं फल, फूल एवं सब्जी उत्पादक संघ हिमाचल प्रदेश के अध्यक्ष हरीश चौहान ने कहा कि जब केंद्र सरकार सभी पात्र किसानों को किसान क्रेडिट कार्ड से जोड़ने का लक्ष्य लेकर चल रही है, तो बड़ी संख्या में आवेदन खारिज होना चिंता का विषय है। उन्होंने कहा कि किसानों से अनेक औपचारिकताएं पूरी करवाई जाती हैं, जबकि बड़े उद्योगपतियों को ऋण और ब्याज में राहत मिलती है। किसानों के साथ इस प्रकार का व्यवहार दुर्भाग्यपूर्ण है।
