हिमाचल के किसानों को बड़ी राहत: बकाया कृषि ऋण के ब्याज का 50% सरकार भरेगी, हजारों किसानों को मिलेगा लाभ
क्या आपका कृषि लोन बढ़ते ब्याज के कारण बोझ बन गया है? अब राहत की खबर है।
हिमाचल सरकार ऐसे किसानों के लिए आगे आई है, जिनकी जमीन कर्ज के कारण नीलामी के खतरे में है। सरकार अब बकाया ब्याज का आधा हिस्सा खुद चुकाएगी।
शिमला। आर्थिक संकट और बढ़ते कर्ज के बोझ से जूझ रहे किसानों को राहत देने के लिए हिमाचल प्रदेश सरकार ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। सरकार ने कृषि ऋण ब्याज सब्सिडी योजना को लागू करने का फैसला किया है, जिसके तहत पात्र किसानों के बकाया कृषि ऋण पर लगने वाले ब्याज का 50 प्रतिशत हिस्सा सरकार स्वयं वहन करेगी।
यह योजना वन टाइम सेटलमेंट (ओटीएस) नीति के अंतर्गत लागू की जाएगी। सरकार का उद्देश्य उन किसानों को राहत पहुंचाना है, जिनकी आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण कृषि भूमि नीलामी के खतरे में पहुंच गई है।
सरकार की ओर से प्रति किसान तीन लाख रुपये तक के कृषि ऋण पर बकाया ब्याज का आधा हिस्सा चुकाया जाएगा। इस योजना से प्रदेश के करीब 6,356 किसानों को सीधा लाभ मिलने की संभावना है। इसके लिए राज्य सरकार ने 50 करोड़ रुपये का बजट भी निर्धारित किया है।
यह योजना हिमाचल प्रदेश राज्य सहकारी कृषि एवं ग्रामीण विकास बैंक तथा कांगड़ा सहकारी कृषि एवं ग्रामीण विकास बैंक के माध्यम से संचालित की जाएगी। संबंधित बैंक शाखाएं पात्र किसानों की पहचान कर लाभार्थियों की सूची तैयार करेंगी।
मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने कहा कि किसान प्रदेश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं और उनकी आर्थिक सुरक्षा सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। उन्होंने कहा कि कई किसान विपरीत परिस्थितियों और आर्थिक संकट के कारण समय पर ऋण नहीं चुका पाए, जिससे उनकी जमीनें नीलामी के खतरे में पहुंच गईं।
मुख्यमंत्री ने बताया कि इस योजना के माध्यम से किसानों को राहत मिलेगी, उनके ऋण नियमित हो सकेंगे और वे अपनी भूमि को सुरक्षित रखते हुए खेती जारी रख पाएंगे। उन्होंने संबंधित विभागों और बैंकों को निर्देश दिए हैं कि योजना को शीघ्र लागू कर पात्र किसानों तक इसका लाभ पहुंचाया जाए।
सरकार का कहना है कि कृषि क्षेत्र को मजबूत बनाने और किसानों की आय बढ़ाने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। राज्य में प्राकृतिक खेती को भी बढ़ावा दिया जा रहा है तथा प्राकृतिक तरीके से उगाई गई फसलों के लिए समर्थन मूल्य की व्यवस्था की गई है। इससे किसानों की आमदनी बढ़ने के साथ-साथ ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिल रही है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार किसानों के हितों की रक्षा करने और प्रदेश में कृषि क्षेत्र को दीर्घकालिक रूप से मजबूत बनाने के लिए प्रतिबद्ध है।
