हिमाचल में HRTC कर्मचारियों की हड़ताल पर लगी कानूनी रोक, सरकार ने लागू किया ESMA; जानिए क्या होंगे इसके असर
शिमला। 25 जून से प्रस्तावित एचआरटीसी कर्मचारियों की हड़ताल से पहले हिमाचल सरकार ने बड़ा प्रशासनिक कदम उठाया है। सरकार ने प्रदेशभर में एचआरटीसी सेवाओं को आवश्यक सेवा घोषित करते हुए एस्मा (ESMA) लागू कर दिया है। इसके साथ ही अगले छह महीने तक कर्मचारियों के हड़ताल पर जाने पर कानूनी रोक लग गई है।
अगर कर्मचारी अब भी हड़ताल करते हैं तो उन्हें केवल विभागीय कार्रवाई ही नहीं, बल्कि कानूनी कार्रवाई का भी सामना करना पड़ सकता है। सरकार का कहना है कि बस सेवाएं बाधित होने से लाखों यात्रियों, विद्यार्थियों, मरीजों और आम जनता को गंभीर परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है।
परिवहन विभाग की ओर से जारी अधिसूचना के अनुसार, एचआरटीसी कर्मचारी न तो हड़ताल शुरू कर सकेंगे और न ही किसी प्रकार से हड़ताल को बढ़ावा दे सकेंगे। सरकार ने एचआरटीसी प्रबंधन को आदेशों का सख्ती से पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही सभी जिलाधीशों और पुलिस अधीक्षकों को भी आवश्यक सहयोग देने को कहा गया है।
गौरतलब है कि एचआरटीसी कर्मचारी यूनियनों ने लंबित वित्तीय लाभों, वेतन संबंधी मांगों और अन्य मुद्दों को लेकर 25 जून से हड़ताल करने का ऐलान किया था। हालांकि सरकार के इस फैसले के बाद प्रस्तावित हड़ताल पर फिलहाल कानूनी रोक लग गई है।
क्या है ESMA?
एस्मा यानी “आवश्यक सेवाएं अनुरक्षण अधिनियम” ऐसा कानून है, जिसे सरकार तब लागू करती है जब किसी जरूरी सेवा के बंद होने से जनजीवन प्रभावित होने की आशंका होती है। इस कानून के लागू होने के बाद संबंधित विभाग के कर्मचारी हड़ताल नहीं कर सकते।
HRTC कर्मचारियों पर क्या होगा असर?
- कर्मचारी हड़ताल नहीं कर सकेंगे।
- कोई भी कर्मचारी हड़ताल में भाग नहीं ले सकेगा।
- हड़ताल के लिए उकसाने या समर्थन करने पर भी कार्रवाई हो सकती है।
- आदेशों का उल्लंघन करने पर निलंबन, वेतन कटौती और अन्य अनुशासनात्मक कार्रवाई की जा सकती है।
किन सेवाओं में लागू किया जाता है ESMA?
- सार्वजनिक परिवहन सेवाएं
- स्वास्थ्य सेवाएं
- बिजली आपूर्ति
- जलापूर्ति सेवाएं
- अग्निशमन सेवाएं
- अन्य आवश्यक सरकारी सेवाएं
क्या कर्मचारी अपनी मांगें नहीं उठा सकते?
एस्मा लागू होने के बावजूद कर्मचारी अपनी मांगों को सरकार के समक्ष रख सकते हैं। वे बातचीत, ज्ञापन, कानूनी विरोध या अन्य लोकतांत्रिक तरीकों का सहारा ले सकते हैं। हालांकि इस अवधि में हड़ताल या कामकाज ठप करना प्रतिबंधित रहेगा।
सरकार का मानना है कि प्रदेश में बस सेवाओं को सुचारू बनाए रखने और आम लोगों की परेशानियों से बचाने के लिए यह कदम जरूरी है।
