Shimla: 21 हजार मिड-डे मील कर्मियों का सरकार को अल्टीमेटम, 12 माह वेतन और 7000 मानदेय की मांग तेज
“10 महीने की तनख्वाह में सालभर का घर कैसे चले?” इसी सवाल के साथ सोमवार को शिमला में हजारों मिड-डे मील कर्मियों का गुस्सा सड़कों पर दिखाई दिया।
12 माह का वेतन, 7000 रुपये मानदेय और सामाजिक सुरक्षा की मांग को लेकर कर्मियों ने सचिवालय तक जोरदार प्रदर्शन कर सरकार को चेतावनी दी कि मांगें नहीं मानी गईं तो आंदोलन और उग्र होगा।
शिमला। मिड-डे मील वर्कर्स यूनियन (सीटू संबंधित) के बैनर तले प्रदेशभर से पहुंचे कर्मियों ने सोमवार को शिमला के टॉलैंड क्षेत्र में एकत्र होकर रैली निकाली। नारेबाजी करते हुए प्रदर्शनकारी सचिवालय पहुंचे और अपनी लंबित मांगों को लेकर सरकार के खिलाफ रोष व्यक्त किया।
रैली को संबोधित करते हुए यूनियन नेताओं ने कहा कि प्रदेश में करीब 21 हजार मिड-डे मील कर्मी कार्यरत हैं, लेकिन उन्हें बेहद कम मानदेय पर काम करना पड़ रहा है। उनका कहना है कि वर्तमान में उन्हें केंद्र सरकार के अंशदान सहित लगभग 5000 रुपये मासिक मानदेय मिलता है, जो केवल 10 माह के लिए दिया जाता है।
सीटू के राष्ट्रीय सचिव कश्मीर सिंह ठाकुर और राज्य महासचिव प्रेम गौतम ने कहा कि स्कूलों के विलय, क्लस्टर योजना और केंद्रीय किचन जैसी व्यवस्थाओं के कारण हजारों कर्मियों के रोजगार पर संकट मंडरा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि इन नीतियों से मिड-डे मील योजना कमजोर हो रही है।
यूनियन के राज्य अध्यक्ष संदीप कुमार ने बताया कि हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने मिड-डे मील कर्मियों को 10 माह के बजाय 12 माह का वेतन देने के पक्ष में फैसला दिया था, जिसे एकल पीठ और खंडपीठ दोनों ने बरकरार रखा। इसके बावजूद सरकार द्वारा इस मामले को सर्वोच्च न्यायालय में ले जाने पर कर्मियों में नाराजगी है।
कर्मियों ने हरियाणा की तर्ज पर 7000 रुपये मासिक मानदेय देने की मांग उठाई। इसके साथ ही कर्मचारी भविष्य निधि (ईपीएफ), कर्मचारी राज्य बीमा (ईएसआई), ग्रेच्युटी, पेंशन, 20 आकस्मिक अवकाश, दो वर्दियां और समय पर वेतन भुगतान की मांग भी की गई।
यूनियन नेताओं ने 25 विद्यार्थियों की अनिवार्य शर्त समाप्त करने, योजना का विस्तार जमा दो तक करने तथा क्लस्टर योजना के नाम पर हो रही छंटनी पर रोक लगाने की भी मांग की।
प्रदर्शन के बाद यूनियन के प्रतिनिधिमंडल ने मुख्य सचिव को मांगपत्र सौंपा। प्रतिनिधिमंडल ने मिड-डे मील कर्मियों की समस्याओं को विस्तार से रखा। मुख्य सचिव ने शिक्षा मंत्री के साथ जल्द बैठक करवाने का आश्वासन दिया।
हालांकि, यूनियन ने स्पष्ट किया है कि यदि मांगों पर जल्द सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया तो प्रदेशभर में आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा।
