हिमाचल मिड डे मील वर्कर रहेंगे आज हड़ताल पर, सीटू के बैनर तले निकालेंगे रैली
शिमला। सूबे के हजारों स्कूलों की रसोई आज ठंडी पड़ सकती है। मिड-डे मील वर्करों ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए सचिवालय तक हुंकार भरने का ऐलान किया है।
वेतन, पेंशन और 12 महीने के मानदेय की मांग को लेकर सोमवार को प्रदेशभर के मिड-डे मील वर्कर हड़ताल पर उतरेंगे, जिससे कई सरकारी स्कूलों की व्यवस्था प्रभावित होने की संभावना जताई जा रही है।
प्रदेशभर में सीटू से संबंधित मिड-डे मील वर्कर यूनियन ने अपनी लंबित मांगों को लेकर सोमवार को हड़ताल का ऐलान किया है। यूनियन के बैनर तले बड़ी संख्या में वर्कर शिमला में एकत्र होकर सचिवालय तक रैली निकालेंगे और सरकार के खिलाफ प्रदर्शन करेंगे।
जानकारी के अनुसार, रैली टॉलैंड क्षेत्र से शुरू होकर सचिवालय तक पहुंचेगी। इस दौरान वर्कर नारेबाजी करते हुए अपनी मांगों को सरकार के समक्ष रखेंगे। यूनियन का कहना है कि लंबे समय से मांगें लंबित हैं, लेकिन न तो राज्य सरकार और न ही केंद्र सरकार की ओर से कोई ठोस कदम उठाया गया है।
यूनियन नेताओं का आरोप है कि पिछले कई वर्षों से मिड-डे मील वर्करों के मानदेय में कोई उल्लेखनीय वृद्धि नहीं हुई है। उनका कहना है कि बढ़ती महंगाई के दौर में वर्तमान मानदेय से परिवार का पालन-पोषण करना मुश्किल हो गया है।
वर्करों ने यह भी आरोप लगाया कि महिला सशक्तीकरण की बातें करने वाली सरकारें जमीनी स्तर पर काम कर रही महिला कर्मचारियों की समस्याओं को गंभीरता से नहीं ले रही हैं। यूनियन के अनुसार, उच्च न्यायालय के निर्णय के बावजूद 10 माह के स्थान पर 12 माह का वेतन अभी तक लागू नहीं किया गया है।
इसके अलावा, वर्करों ने पूरे वर्ष कार्य लेने, नियमित अवकाश नहीं मिलने, कई महीनों तक मानदेय लंबित रहने, चुनावी ड्यूटी के दौरान अतिरिक्त कार्य के बदले भुगतान न मिलने, तथा सेवानिवृत्ति के बाद पेंशन और ग्रेच्युटी जैसी सुविधाओं के अभाव का मुद्दा भी उठाया है।
यूनियन ने मांग की है कि हरियाणा की तर्ज पर हिमाचल में भी मिड-डे मील वर्करों को कम से कम 7000 रुपये मासिक वेतन दिया जाए। साथ ही अन्य लंबित मांगों को भी जल्द पूरा किया जाए।
मिड-डे मील वर्कर यूनियन के पदाधिकारियों का कहना है कि यदि सरकार उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार नहीं करती है तो आने वाले दिनों में आंदोलन को और तेज किया जा सकता है।
