टीजीटी हिंदी पदोन्नति पर हाईकोर्ट की बड़ी रोक, हजारों शिक्षकों की उम्मीदों पर लगा ब्रेक
शिमला। हिमाचल प्रदेश में जेबीटी शिक्षकों को टीजीटी हिंदी के पदों पर दी गई पदोन्नति पर हाईकोर्ट की रोक ने शिक्षा विभाग में हलचल मचा दी है। अदालत के इस फैसले से कई शिक्षकों की पदोन्नति फिलहाल अधर में लटक गई है, जबकि सरकार और शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
हाईकोर्ट की इस टिप्पणी ने मामले को और गंभीर बना दिया है कि यदि इन पदोन्नतियों को जारी रहने दिया गया तो यह एक कथित गैरकानूनी प्रक्रिया को वैधता देने जैसा होगा। ऐसे में अब सभी की निगाहें आगामी सुनवाई पर टिकी हुई हैं।
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट के न्यायाधीश अजय मोहन गोयल की अदालत ने शिक्षा विभाग में कार्यरत जेबीटी शिक्षकों को भाषा शिक्षक (टीजीटी हिंदी) के पद पर दी गई पदोन्नति पर अंतरिम रोक लगा दी है। अदालत ने मामले से जुड़े सभी प्रतिवादियों को नोटिस जारी करते हुए राज्य सरकार को 5 अगस्त तक जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए हैं।
मामले की अगली सुनवाई 7 अगस्त को निर्धारित की गई है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि शिक्षा विभाग ने पुराने भर्ती एवं पदोन्नति नियम, 2009 के आधार पर पदोन्नति प्रक्रिया पूरी की, जबकि राज्य सरकार 18 फरवरी 2025 को टीजीटी हिंदी के लिए नए भर्ती एवं पदोन्नति नियम लागू कर चुकी थी।
जानकारी के अनुसार, शिक्षा विभाग ने जेबीटी शिक्षकों को भाषा शिक्षक के पद पर पदोन्नत करने के लिए विभागीय पदोन्नति समिति (डीपीसी) का गठन किया था। इसके बाद 31 मार्च 2026 को पदोन्नति आदेश जारी किए गए।
याचिकाकर्ता की ओर से अदालत में तर्क दिया गया कि 22 फरवरी 2025 को नए नियम राजपत्र में प्रकाशित होने के बाद 2009 के पुराने नियम स्वतः समाप्त हो गए थे। ऐसे में 18 फरवरी 2025 के बाद आयोजित किसी भी विभागीय पदोन्नति समिति को नए नियमों के आधार पर ही पदोन्नति प्रक्रिया पूरी करनी चाहिए थी।
अदालत ने प्रारंभिक सुनवाई के दौरान मामले को गंभीर मानते हुए पदोन्नति आदेशों पर रोक लगा दी है। अब राज्य सरकार और शिक्षा विभाग के जवाब के बाद आगामी सुनवाई में इस मामले पर आगे की कार्रवाई होगी।
इस फैसले का असर प्रदेश के उन जेबीटी शिक्षकों पर पड़ सकता है जिन्हें हाल ही में टीजीटी हिंदी के पदों पर पदोन्नति मिली है या जो पदोन्नति की प्रक्रिया में शामिल थे।
