
कालाअंब औद्योगिक क्षेत्र में गंदगी के ढेर, लोगों ने प्रशासन से की ठोस सफाई व्यवस्था की मांग
कालाअंब (सिरमौर)। औद्योगिक क्षेत्र कालाअंब में जगह-जगह लगे कूड़े के ढेर स्थानीय लोगों और राहगीरों के लिए परेशानी का कारण बन गए हैं। सड़कों के किनारे जमा कचरे से उठने वाली दुर्गंध के बीच लोगों को आवागमन करना पड़ रहा है। क्षेत्रवासियों ने जिला प्रशासन और संबंधित विभागों से तत्काल प्रभावी कदम उठाने की मांग की है।
जानकारी के अनुसार कालाअंब, खैरी, जोहड़ों, मैनथापल और मोगीनंद क्षेत्रों में सड़कों के किनारे कचरे के ढेर लगातार बढ़ रहे हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि क्षेत्र में कूड़ा उठाने की व्यवस्था केवल कागजों तक सीमित दिखाई देती है, जबकि जमीनी स्तर पर सफाई व्यवस्था पूरी तरह से नाकाफी है।
लोगों का कहना है कि कूड़ा एकत्र करने के लिए जो वाहन लगाया गया है, वह भी नियमित रूप से नहीं आता। कई बार वाहन केवल आंशिक कचरा उठाकर चला जाता है, जबकि शेष कचरा वहीं पड़ा रहता है और अगले दिन उसमें और अधिक कचरा जुड़ जाता है। इससे क्षेत्र में गंदगी लगातार बढ़ती जा रही है।
स्थानीय निवासियों वरुण कुमार, अनिल, राम सिंह, केवल मोहन, रवीना, शर्मीला, कंचन, दीप राम, रुपलाल और चेत राम ने बताया कि कालाअंब क्षेत्र में पर्याप्त संख्या में कूड़ेदान उपलब्ध नहीं हैं। जहां कूड़ेदान रखे गए हैं, उनमें से कई टूटे-फूटे और जर्जर अवस्था में हैं। इसके कारण कूड़ेदानों से बाहर भी कचरा बिखरा रहता है, जिससे स्वच्छता व्यवस्था प्रभावित हो रही है।
उन्होंने कहा कि औद्योगिक क्षेत्र होने के कारण यहां प्रतिदिन बड़ी मात्रा में कूड़ा-करकट उत्पन्न होता है, लेकिन उसे उठाने के लिए लगाई गई छोटी गाड़ी पर्याप्त नहीं है। ऐसे क्षेत्र में सीमित संसाधनों के साथ सफाई व्यवस्था संचालित करना समस्या को और बढ़ा रहा है।
क्षेत्रवासियों ने जिला प्रशासन तथा संबंधित विभाग से मांग की है कि मोगीनंद से खैरी तक पूरे क्षेत्र का निरीक्षण कर वास्तविक स्थिति का आकलन किया जाए और कूड़ा संग्रहण व निस्तारण के व्यापक प्रबंध किए जाएं। उनका कहना है कि नियमित सफाई, पर्याप्त कूड़ेदान और अतिरिक्त कूड़ा संग्रहण वाहनों की व्यवस्था से ही क्षेत्र को स्वच्छ और सुंदर बनाया जा सकता है।
उधर, टीसीपी विभाग के अधिकारियों से इस बारे में बात करनी चाही तो बात नहीं हो पाई। जैसे ही उनसे बात होती है तो उनका पक्ष प्रकाशित करके अपडेट दी जाएगी।
