किशाऊ बांध पर हिमाचल की बड़ी जीत, 211 मेगावाट मुफ्त बिजली के साथ हर साल 600 करोड़ रुपये की आय
हिमाचल प्रदेश के लिए किशाऊ बांध परियोजना से बड़ी खुशखबरी सामने आई है। वर्षों से लंबित इस महत्वपूर्ण परियोजना में राज्य सरकार ने अपने हितों को प्राथमिकता देते हुए ऐसा समझौता किया है, जिससे हिमाचल को न केवल 211 मेगावाट मुफ्त बिजली मिलेगी बल्कि आने वाले वर्षों में हर साल करीब 600 करोड़ रुपये की अतिरिक्त आय भी होगी। मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने इसे प्रदेश के लिए ऐतिहासिक उपलब्धि बताया है।
शिमला। शुक्रवार को हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय में नए शैक्षणिक खंड और कंप्यूटर आधारित परीक्षा प्रयोगशाला के उद्घाटन के बाद पत्रकारों से बातचीत करते हुए मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने किशाऊ बांध परियोजना को लेकर महत्वपूर्ण जानकारी साझा की। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने प्रदेश के हितों से समझौता किए बिना अपनी शर्तों पर सहमति दी है।
मुख्यमंत्री ने बताया कि किशाऊ बांध यमुना और टोंस नदी पर प्रस्तावित एक बहुउद्देश्यीय परियोजना है, जिससे राजस्थान, दिल्ली, हरियाणा और अन्य उत्तरी राज्यों को पेयजल तथा सिंचाई के लिए पानी उपलब्ध होगा। हालांकि परियोजना से प्रभावित होने के बावजूद हिमाचल प्रदेश को अपेक्षित लाभ नहीं मिल रहा था, जिसके चलते राज्य सरकार ने प्रारंभ में अपनी सहमति देने से इन्कार कर दिया था।
सुक्खू ने कहा कि सरकार ने स्पष्ट कर दिया था कि यदि हिमाचल प्रदेश को परियोजना से मुफ्त बिजली का लाभ नहीं मिलेगा तो राज्य इसकी मंजूरी नहीं देगा। लगातार प्रयासों और बातचीत के बाद अब हिमाचल प्रदेश को 211 मेगावाट मुफ्त बिजली देने पर सहमति बनी है। इसके अलावा परियोजना के संचालन शुरू होने के लगभग पांच वर्ष बाद प्रदेश को प्रतिवर्ष करीब 600 करोड़ रुपये की आय होने का अनुमान है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि यदि यह परियोजना किसी निजी कंपनी को सौंपी जाती तो हिमाचल को केवल 12 प्रतिशत मुफ्त बिजली रॉयल्टी और एक प्रतिशत स्थानीय क्षेत्र विकास निधि (LADA) का लाभ मिलता। लेकिन वर्तमान समझौते से राज्य को इससे कहीं अधिक आर्थिक लाभ प्राप्त होगा।
उन्होंने इसे प्रदेश के संसाधनों और अधिकारों की रक्षा की दिशा में एक बड़ा कदम बताते हुए कहा कि राज्य सरकार भविष्य में भी ऐसी सभी परियोजनाओं में हिमाचल के हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता देगी। मुख्यमंत्री के अनुसार यह समझौता न केवल प्रदेश की ऊर्जा क्षमता को मजबूत करेगा बल्कि राज्य की आर्थिक स्थिति को भी सुदृढ़ बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
