सिरमौर में आई भीषण तबाही का मंजर! 2,500 मौतें, 18 हजार घायल और डेढ़ लाख बेघर होने की स्थिति पर हुआ बड़ा अभ्यास
नाहन, 15 जून। अगर सिरमौर में एक साथ भूकंप, बाढ़, भूस्खलन, वनाग्नि और भवन गिरने जैसी बड़ी आपदा आ जाए तो प्रशासन कितना तैयार है? इसी की परख के लिए सोमवार को पूरे जिले में जिला स्तरीय मेगा मॉक ड्रिल आयोजित की गई। इस दौरान 2,500 लोगों की मौत, 18 हजार के घायल होने और 1.50 लाख लोगों के बेघर होने की काल्पनिक स्थिति बनाकर राहत एवं बचाव व्यवस्था का परीक्षण किया गया।
जिला सिरमौर में आपदा प्रबंधन की तैयारियों को परखने तथा विभिन्न विभागों के बीच समन्वय को मजबूत बनाने के उद्देश्य से सोमवार को जिला स्तरीय मेगा मॉक ड्रिल का सफल आयोजन किया गया। यह अभ्यास भूकंप, बादल फटने, भूस्खलन, बाढ़, भवन ध्वस्त होने और वनाग्नि जैसी संभावित आपदा परिस्थितियों पर आधारित रहा।
मेगा मॉक ड्रिल के तहत जिले के सभी उपमंडलों में कुल आठ स्थानों पर अलग-अलग आपदा परिदृश्यों का अभ्यास किया गया।
नाहन के कालाअंब में रुचिरा पेपर्स मिल में आग लगने और भूकंप से क्षति, बनेठी क्षेत्र में रात्रिकालीन वनाग्नि, पच्छाद के एसवीएन कॉलोनी सराहां में भवन ध्वस्त होने, राजगढ़ के शिरगुल मार्केट चौक में भवन गिरने, पांवटा साहिब के सिरमौरी ताल क्षेत्र में भूस्खलन, शिलाई के टिंबी क्षेत्र में बाढ़ एवं भवन ध्वस्त होने, कफोटा के राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला सतौन में भवन ध्वस्त होने व आग लगने तथा संगड़ाह की पुरानी तहसील रेणुका जी में भवन ध्वस्त होने की काल्पनिक परिस्थितियों पर राहत एवं बचाव कार्यों का अभ्यास किया गया।
अभ्यास के दौरान विभिन्न विभागों ने खोज एवं बचाव अभियान चलाने, घायलों को प्राथमिक उपचार उपलब्ध कराने, अस्पतालों तक पहुंचाने, राहत शिविर स्थापित करने, प्रभावित लोगों के पुनर्वास, संचार व्यवस्था बहाल करने और आवश्यक संसाधनों की उपलब्धता सुनिश्चित करने की प्रक्रियाओं का परीक्षण किया।
मॉक ड्रिल में पुलिस, होमगार्ड, अग्निशमन विभाग, स्वास्थ्य विभाग, लोक निर्माण विभाग, जल शक्ति विभाग, विद्युत बोर्ड, पंचायती राज संस्थाओं, स्वयंसेवी संगठनों तथा अन्य संबंधित विभागों ने सक्रिय भागीदारी निभाई।
ड्रिल के दौरान 2,500 मृतक, 18,000 घायल, 6,000 अस्पताल में भर्ती और 1,50,000 लोगों के बेघर होने की काल्पनिक स्थिति तैयार कर प्रशासनिक एवं राहत तंत्र की क्षमता का आकलन किया गया। इसके अलावा राहत शिविरों की स्थापना, खाद्य सामग्री एवं आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति तथा आपदा के समय वित्तीय एवं प्रशासनिक प्रबंधन की व्यवस्थाओं को भी परखा गया।
कार्यकारी उपायुक्त सिरमौर एल.आर. वर्मा ने कहा कि इस प्रकार के अभ्यास वास्तविक आपदा की स्थिति में त्वरित और प्रभावी प्रतिक्रिया सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने कहा कि मॉक ड्रिल के दौरान प्राप्त अनुभवों और सुझावों के आधार पर जिला आपदा प्रबंधन योजना को और अधिक प्रभावी बनाया जाएगा।
जिला प्रशासन ने सभी विभागों, स्वयंसेवी संगठनों और आम नागरिकों के सहयोग के लिए आभार व्यक्त करते हुए कहा कि आपदा प्रबंधन में सामुदायिक सहभागिता और विभागीय समन्वय अत्यंत महत्वपूर्ण है तथा भविष्य में भी इस प्रकार के अभ्यास नियमित रूप से आयोजित किए जाते रहेंगे।
