हिमाचल में महंगा होगा व्यावसायिक वाहनों का परमिट, हर दो साल में 10% बढ़ेगा शुल्क
शिमला। हिमाचल प्रदेश में व्यावसायिक वाहन चलाने वालों की जेब पर जल्द अतिरिक्त बोझ पड़ सकता है। करीब 27 साल बाद सरकार ने व्यावसायिक वाहनों के परमिट शुल्क में बढ़ोतरी की तैयारी शुरू कर दी है, वहीं भविष्य में हर दो वर्ष बाद शुल्क स्वतः 10 प्रतिशत बढ़ाने का भी प्रस्ताव रखा गया है।
परिवहन विभाग ने हिमाचल प्रदेश मोटर वाहन नियमों में संशोधन का मसौदा जारी करते हुए सभी श्रेणी के व्यावसायिक वाहनों के परमिट, नवीनीकरण तथा काउंटर सिग्नेचर शुल्क में संशोधन का प्रस्ताव रखा है। इस संबंध में अतिरिक्त मुख्य सचिव परिवहन आरडी नजीम द्वारा अधिसूचना जारी की गई है। विभाग ने आम जनता, परिवहन संचालकों और संबंधित पक्षों से 30 दिनों के भीतर सुझाव और आपत्तियां आमंत्रित की हैं। प्राप्त सुझावों पर विचार करने के बाद ही अंतिम अधिसूचना जारी की जाएगी।
परिवहन विभाग का कहना है कि वर्तमान शुल्क दरों में वर्ष 1999 के बाद कोई बड़ा संशोधन नहीं किया गया है। बदलती आर्थिक परिस्थितियों और प्रशासनिक खर्चों को ध्यान में रखते हुए शुल्क में संशोधन आवश्यक माना गया है। प्रस्तावित नियमों के तहत नई शुल्क दरों में प्रत्येक दो वर्ष बाद 10 प्रतिशत की वृद्धि की जाएगी और बढ़ी हुई राशि को निकटतम 10 रुपये तक राउंड ऑफ किया जाएगा।
ड्राफ्ट नियमों के अनुसार मोटर कैब और ऑटो रिक्शा जैसे कॉन्ट्रैक्ट कैरिज वाहनों के लिए अस्थायी और नियमित दोनों प्रकार के परमिट शुल्क 50-50 रुपये प्रस्तावित किए गए हैं। मैक्सी कैब के लिए भी अस्थायी और नियमित परमिट शुल्क 50 रुपये निर्धारित करने का प्रस्ताव है।
राज्य के भीतर संचालित बसों और ऑल इंडिया टूरिस्ट परमिट वाली बसों के लिए अस्थायी परमिट शुल्क 750 रुपये तथा नियमित परमिट शुल्क 1500 रुपये प्रस्तावित किया गया है। हल्के मालवाहक वाहनों (एलजीवी) के लिए अस्थायी परमिट शुल्क 100 रुपये और नियमित परमिट शुल्क 200 रुपये रखा गया है।
मध्यम एवं भारी मालवाहक वाहनों के लिए अस्थायी और नियमित दोनों प्रकार के परमिट शुल्क 100-100 रुपये प्रस्तावित हैं। वहीं 4+1 से 8+1 सीट क्षमता वाली जीप स्टेज कैरिज के लिए भी अस्थायी और नियमित परमिट शुल्क 100 रुपये निर्धारित करने का प्रस्ताव रखा गया है।
इसके अलावा अन्य स्टेज कैरिज वाहनों तथा निजी सेवा वाहनों के लिए अस्थायी परमिट शुल्क 500 रुपये और नियमित परमिट शुल्क 1000 रुपये प्रस्तावित किया गया है। मोटर वाहन अधिनियम की धारा 88(8) के अंतर्गत जारी किए जाने वाले विशेष परमिट के लिए अस्थायी शुल्क 250 रुपये तथा नियमित शुल्क 50 रुपये निर्धारित करने का सुझाव दिया गया है।
अधिसूचना में यह भी स्पष्ट किया गया है कि परमिट शुल्क नकद रसीद, ऑनलाइन भुगतान अथवा ट्रेजरी चालान के माध्यम से जमा करवाया जा सकेगा। शुल्क प्राप्त होने के बाद संबंधित क्षेत्रीय परिवहन प्राधिकरण (आरटीए) आवेदक को विधिवत रसीद जारी करेगा।
हालांकि भारत में स्थित विदेशी दूतावासों के स्वामित्व वाले परिवहन वाहनों को इस शुल्क से छूट देने का प्रावधान भी मसौदा नियमों में रखा गया है। अब सभी की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि सुझाव और आपत्तियों के बाद सरकार अंतिम नियमों में क्या बदलाव करती है।
