हिमाचल में शिक्षा व्यवस्था में बड़ा बदलाव: 20 सरकारी स्कूल बंद, 73 का विलय साढ़े तीन साल में 1350 स्कूलों पर गिरी गाज
सरकार बोली- छात्रों को मिलेंगी बेहतर सुविधाएं
शिमला। हिमाचल प्रदेश सरकार ने शिक्षा व्यवस्था के युक्तिकरण की दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए राज्य के 20 सरकारी विद्यालयों को तत्काल प्रभाव से बंद करने और 73 विद्यालयों का विलय करने का निर्णय लिया है। शिक्षा सचिव राकेश कंवर द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार जिन विद्यालयों में छात्र संख्या शून्य थी, उन्हें डिनोटिफाई कर बंद कर दिया गया है, जबकि पांच या उससे कम विद्यार्थियों वाले स्कूलों को नजदीकी विद्यालयों में मर्ज किया गया है।
सरकार का कहना है कि इस निर्णय से शिक्षा संसाधनों का बेहतर उपयोग होगा और विद्यार्थियों को अधिक गुणवत्तापूर्ण शैक्षणिक सुविधाएं उपलब्ध कराई जा सकेंगी। उल्लेखनीय है कि वर्तमान सरकार अपने साढ़े तीन वर्ष के कार्यकाल में अब तक करीब 1350 स्कूलों को बंद या मर्ज कर चुकी है।
अधिसूचना के अनुसार 18 सरकारी प्राथमिक विद्यालय और दो सरकारी माध्यमिक विद्यालयों को गैर-अधिसूचित किया गया है। बंद किए गए विद्यालयों में बिलासपुर जिले का जीपीएस हीरापुर, चंबा जिले के जीपीएस भरेरा-द्वितीय और जीपीएस दादुएन, कुल्लू जिले का जीपीएस धामण तथा मंडी जिले के जीपीएस शैलैग, जीपीएस मग्गर, जीपीएस कांगड़ और जीपीएस कुफरी शामिल हैं।
शिमला जिले में सबसे अधिक 10 विद्यालयों को बंद किया गया है। इनमें जीपीएस मदारा, जीपीएस जिताटा, जीपीएस टिप्रोली, जीपीएस चालान, जीपीएस गनोटी, जीपीएस हरोग, जीपीएस घुर्मु, जीपीएस डायला, जीपीएस गुम्मा-द्वितीय और जीपीएस खारू शामिल हैं। इसके अलावा मंडी जिले का जीएमएस टिक्की तथा शिमला जिले का जीएमएस बणीबासा भी बंद किए गए हैं।
वहीं सरकार ने छात्र संख्या पांच या उससे कम होने पर 73 विद्यालयों का नजदीकी स्कूलों में विलय करने का फैसला लिया है। इनमें 65 सरकारी प्राथमिक विद्यालय और आठ सरकारी माध्यमिक विद्यालय शामिल हैं। इन स्कूलों को सरकारी प्राथमिक विद्यालय, केंद्रीय प्राथमिक विद्यालय, माध्यमिक विद्यालय अथवा वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालयों में समाहित किया गया है।
विलय किए गए विद्यालयों में सबसे अधिक 21 स्कूल मंडी जिले के हैं। इसके बाद शिमला में 15, बिलासपुर में 9, कांगड़ा और किन्नौर में 6-6, लाहौल-स्पीति में 4, चंबा में 3 तथा कुल्लू, हमीरपुर, सिरमौर और ऊना में 2-2 विद्यालयों का विलय किया गया है। सोलन जिले में भी एक विद्यालय को मर्ज किया गया है।
सरकार ने स्पष्ट किया है कि बंद और विलय किए गए विद्यालयों में कार्यरत शिक्षकों एवं अन्य कर्मचारियों को विभागीय दिशा-निर्देशों के अनुसार अन्य संस्थानों में समायोजित किया जाएगा। साथ ही स्कूलों के भवन, कार्यालय रिकॉर्ड और अन्य संसाधनों का भी नियमानुसार स्थानांतरण किया जाएगा। सरकार का दावा है कि इस कदम से शिक्षा व्यवस्था को अधिक प्रभावी और संसाधन-संपन्न बनाया जा सकेगा।
