रोहनाट कॉलेज बंद करने का फैसला सरकार की नाकामी, एसएफआई ने दी उग्र आंदोलन की चेतावनी
रोहनाट कॉलेज बंद करने के फैसले पर छात्रों का गुस्सा बढ़ने लगा है। एसएफआई ने सरकार को चेतावनी दी है कि फैसला वापस नहीं लिया गया तो प्रदेशभर में उग्र छात्र आंदोलन छेड़ा जाएगा।
नाहन (सिरमौर)। हिमाचल प्रदेश सरकार द्वारा प्रदेश के 10 सरकारी कॉलेजों को बंद करने के निर्णय का विरोध तेज होने लगा है। स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (एसएफआई) ने इस फैसले को छात्र विरोधी बताते हुए सरकार पर ग्रामीण क्षेत्रों के विद्यार्थियों के भविष्य से खिलवाड़ करने का आरोप लगाया है। संगठन ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने निर्णय वापस नहीं लिया तो प्रदेशभर में व्यापक आंदोलन शुरू किया जाएगा।
एसएफआई के राज्य सह-सचिव कमल शर्मा ने मीडिया को जारी बयान में कहा कि सिरमौर जिले का सरकारी कॉलेज रोहनाट भी बंद किए जाने वाले संस्थानों की सूची में शामिल है। उन्होंने कहा कि वर्तमान में कॉलेज में करीब 70 छात्र-छात्राएं शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं, जिनमें बड़ी संख्या छात्राओं की है।
उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार उच्च शिक्षा को सुदृढ़ करने के बजाय शिक्षण संस्थानों को बंद करने की नीति अपना रही है। कमल शर्मा ने कहा कि रोहनाट कॉलेज लंबे समय से मूलभूत सुविधाओं की कमी का सामना कर रहा है। कॉलेज में पर्याप्त शिक्षकों की नियुक्ति नहीं की गई है और आज तक इसका अपना स्थायी भवन भी उपलब्ध नहीं हो पाया है। इसके बावजूद क्षेत्र के विद्यार्थी यहां पढ़ाई कर रहे हैं।
एसएफआई का कहना है कि सरकार को कॉलेजों की सुविधाओं में सुधार करना चाहिए था, लेकिन इसके विपरीत उन्हें बंद करने का निर्णय लिया गया है। संगठन के अनुसार इस कदम का सबसे अधिक असर ग्रामीण, गरीब और पिछड़े वर्ग के विद्यार्थियों पर पड़ेगा। विशेष रूप से छात्राओं के लिए उच्च शिक्षा प्राप्त करना और कठिन हो जाएगा, क्योंकि उन्हें पढ़ाई के लिए दूरस्थ क्षेत्रों का रुख करना पड़ेगा।
संगठन ने सरकार से मांग की है कि बंद किए गए कॉलेजों के फैसले पर तत्काल पुनर्विचार किया जाए और आवश्यक शिक्षकों, भवन तथा अन्य सुविधाओं की व्यवस्था कर संस्थानों को नियमित रूप से संचालित किया जाए।
एसएफआई ने स्पष्ट किया है कि यदि सरकार ने छात्रों और अभिभावकों की चिंताओं को नजरअंदाज किया तो प्रदेशभर में छात्रों को संगठित कर चरणबद्ध और व्यापक आंदोलन चलाया जाएगा। संगठन का कहना है कि ऐसी स्थिति में उत्पन्न होने वाले हालात की पूरी जिम्मेदारी सरकार की होगी।
