अब बच्चों की पीठ नहीं झुकेगी भारी बस्तों से!
हिमाचल में स्कूल बैग पर लगा “10 फीसदी वजन” नियम, निजी स्कूलों की मनमानी पर भी कसा शिकंजा
शिमला। हिमाचल प्रदेश में स्कूली बच्चों को भारी बस्तों के बोझ से राहत देने के लिए शिक्षा विभाग ने बड़ा फैसला लिया है। प्रदेश सरकार ने स्पष्ट निर्देश जारी करते हुए कहा है कि अब किसी भी विद्यार्थी के स्कूल बैग का वजन उसके कुल शारीरिक वजन के 10 प्रतिशत से अधिक नहीं होना चाहिए। यह नियम प्रदेश के सभी सरकारी और निजी स्कूलों में समान रूप से लागू किया जाएगा।
शिक्षा विभाग द्वारा जारी निर्देशों के बाद अब स्कूल प्रबंधन की जिम्मेदारी तय कर दी गई है। विभाग ने कहा है कि यदि किसी स्कूल में बच्चों के बैग निर्धारित सीमा से अधिक भारी पाए गए तो संबंधित संस्थान के खिलाफ प्रशासनिक कार्रवाई की जा सकती है।
दरअसल, लंबे समय से अभिभावकों द्वारा यह शिकायत की जा रही थी कि कई निजी स्कूल जरूरत से ज्यादा किताबें और कॉपियां अनिवार्य कर बच्चों पर अतिरिक्त बोझ डाल रहे हैं। कई स्कूल निजी प्रकाशकों की भारी और महंगी किताबें भी पाठ्यक्रम में शामिल कर देते हैं, जिससे बच्चों के बैग का वजन लगातार बढ़ता जा रहा था।
इसी को देखते हुए शिक्षा विभाग ने अब सभी स्कूलों में एनसीईआरटी की मानक पुस्तकों को अनिवार्य रूप से लागू करने के निर्देश दिए हैं। विभाग का मानना है कि इससे बच्चों को केवल आवश्यक और गुणवत्तापूर्ण अध्ययन सामग्री ही पढ़नी होगी और बस्ते का वजन भी नियंत्रित रहेगा।
शिक्षा उप निदेशक उच्च शिक्षा गोपाल चौहान ने बताया कि इस व्यवस्था को प्रभावी बनाने के लिए स्कूलों को अपना टाइम-टेबल भी नए तरीके से तैयार करना होगा। विद्यार्थियों को रोजाना सभी विषयों की किताबें लाने की बजाय केवल उसी दिन पढ़ाए जाने वाले विषयों की किताबें और कॉपियां लाने के लिए कहा जाएगा।
उन्होंने सभी सरकारी और निजी स्कूल प्रबंधनों को निर्देश दिए हैं कि नई व्यवस्था को जल्द से जल्द लागू किया जाए ताकि बच्चों को अनावश्यक बोझ से राहत मिल सके।
