Home क्राइम हिमाचल में नकली दवाओं का बड़ा रैकेट बेनकाब! ऑनलाइन बिक रही थी ‘नशे वाली’ प्रेगाबलिन, यूपी का आरोपी गिरफ्तार

हिमाचल में नकली दवाओं का बड़ा रैकेट बेनकाब! ऑनलाइन बिक रही थी ‘नशे वाली’ प्रेगाबलिन, यूपी का आरोपी गिरफ्तार

by Dainik Janvarta
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हिमाचल में नकली दवाओं का बड़ा खेल उजागर, ऑनलाइन सप्लाई से फैल रहा था जहर!

दिमागी बीमारी की दवा के नाम पर बेचा जा रहा था नशा, एक आरोपी गिरफ्तार—जांच में चौंकाने वाले खुलासे

चंबा। हिमाचल प्रदेश के चंबा जिले में ऑनलाइन नकली दवाओं के कारोबार का सनसनीखेज भंडाफोड़ हुआ है। स्वास्थ्य विभाग की जांच में सामने आया है कि दिमागी बीमारी के इलाज में इस्तेमाल होने वाली दवा के नाम पर नकली कैप्सूल तैयार कर युवाओं को बेचे जा रहे थे, जिनका इस्तेमाल नशे के तौर पर किया जा रहा था।

जानकारी के मुताबिक, मुंबई में तैयार की जा रही इन नकली दवाओं पर असली कंपनी का ठप्पा लगाकर उन्हें ऑनलाइन माध्यम से हिमाचल भेजा जा रहा था। मामला तब उजागर हुआ जब संबंधित दवा कंपनी को विभाग की ओर से नोटिस जारी किया गया। जांच के दौरान कंपनी ने साफ किया कि यह दवा उन्होंने बनाई ही नहीं, बल्कि उनके नाम का दुरुपयोग किया गया।

मामले की तह तक पहुंचने के लिए ड्रग इंस्पेक्टर ने फैक्टरी स्तर पर जांच की, जिसमें पुष्टि हुई कि यह पूरा नेटवर्क फर्जीवाड़े पर आधारित है। इसके बाद कार्रवाई करते हुए उत्तर प्रदेश निवासी मोहम्मद अहमद को गिरफ्तार किया गया, जो ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के जरिए चंबा में दवाएं सप्लाई कर रहा था। अदालत ने आरोपी को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया है।

पूछताछ में आरोपी ने अपने चार अन्य साथियों के नाम भी उजागर किए हैं, जिनकी तलाश में जांच एजेंसियां जुट गई हैं। यह भी सामने आया है कि आरोपी कूरियर के माध्यम से बिना बिल के दवाओं की सप्लाई करता था और पिछले कुछ समय से यह नेटवर्क सक्रिय था।

इस पूरे मामले की शुरुआत दिसंबर महीने में हुई थी, जब ड्रग इंस्पेक्टर लवली ठाकुर ने जुलाहकड़ी निवासी एक व्यक्ति को बिना बिल की दवाओं के साथ पकड़ा था। उसके पास से प्रेगाबलिन के 750 कैप्सूल बरामद हुए थे, जो उसने ऑनलाइन मंगवाए थे। इसी सुराग के आधार पर विभाग ने जांच को आगे बढ़ाया और बड़े रैकेट का पर्दाफाश किया।

स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार, बीते दो वर्षों में चंबा जिले में अवैध नशीली दवाओं से जुड़े 40 मामले दर्ज किए जा चुके हैं। इनमें से तीन मामलों में केमिस्टों के खिलाफ अदालत में केस चल रहे हैं, जबकि दो दर्जन से अधिक केमिस्टों के लाइसेंस रद्द किए जा चुके हैं।

राज्य दवा नियंत्रक मनीष कपूर ने बताया कि मामले की हर एंगल से जांच की जा रही है और आरोपी द्वारा बताए गए अन्य लोगों को जल्द पकड़ने के प्रयास जारी हैं। साथ ही यह भी पता लगाया जा रहा है कि यह नकली दवाएं किन-किन क्षेत्रों में सप्लाई की गई हैं।

फिलहाल इस खुलासे ने ऑनलाइन दवा खरीदने की प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं, और स्वास्थ्य विभाग ने लोगों से बिना सत्यापन के दवाएं न खरीदने की अपील की है।

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