हिमाचल की सियासत में बड़ा मोड़—क्या पंचायत चुनाव पूरी तरह “गैर-दलीय” रहेंगे या अंदरखाने चलेगी राजनीति?
शिमला। हिमाचल प्रदेश में आगामी पंचायत और शहरी निकाय चुनाव को लेकर सियासी माहौल गरमाने लगा है। इसी बीच मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुखू ने बड़ा बयान देते हुए साफ कर दिया है कि कांग्रेस पार्टी पंचायत चुनाव में अपने आधिकारिक उम्मीदवार मैदान में नहीं उतारेगी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि पंचायत चुनाव पूरी तरह स्थानीय स्तर के होते हैं और इनमें हर व्यक्ति को स्वतंत्र रूप से चुनाव लड़ने का अधिकार है। उन्होंने जोर देकर कहा कि राज्य सरकार ने चुनाव समय पर कराने के लिए सभी तैयारियां पूरी कर ली हैं और प्रक्रिया तय समय पर ही पूरी की जाएगी।
सुक्खू ने यह भी स्पष्ट किया कि कांग्रेस संगठन स्तर पर किसी प्रत्याशी की घोषणा नहीं करेगी, जिससे चुनाव गैर-दलीय स्वरूप में ही संपन्न हों। हालांकि, राजनीतिक जानकारों का मानना है कि भले ही पार्टी आधिकारिक तौर पर उम्मीदवार न उतारे, लेकिन स्थानीय स्तर पर समर्थन और रणनीति की भूमिका अहम रह सकती है।
भाजपा पर सीधा हमला
मुख्यमंत्री ने इस दौरान विपक्षी दल भाजपा पर भी तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि पिछली सरकार ने केवल मुद्दे बनाकर राजनीति की, जबकि वर्तमान सरकार जमीनी स्तर पर विकास कार्यों को अमलीजामा पहना रही है।
हिमकेयर योजना पर गंभीर आरोप
सुक्खू ने पूर्व सरकार के कार्यकाल में चलाई गई हिमकेयर योजना को लेकर भी बड़ा खुलासा किया। उन्होंने कहा कि इस योजना में गंभीर अनियमितताएं सामने आई हैं। यहां तक कि रिकॉर्ड में पुरुषों के ओवरी ऑपरेशन तक दिखाए गए, जो अपने आप में हैरान करने वाला मामला है।
मुख्यमंत्री ने बताया कि राज्य सरकार ने इस पूरे मामले की जांच के आदेश दे दिए हैं और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
सियासी संकेत क्या हैं?
कांग्रेस का पंचायत चुनाव में उम्मीदवार न उतारने का फैसला एक रणनीतिक कदम माना जा रहा है। इससे पार्टी पर सीधे राजनीतिक आरोपों का दबाव कम रहेगा, वहीं स्थानीय स्तर पर अपने समर्थकों को खुलकर मैदान में उतारने की छूट भी मिलेगी।
अब देखना होगा कि भाजपा इस फैसले को किस तरह लेती है और क्या पंचायत चुनाव वास्तव में गैर-दलीय रह पाते हैं या फिर पर्दे के पीछे राजनीतिक मुकाबला जारी रहता है।
