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Himachal Elections Update: 17 मई को शहरी निकाय चुनाव, आचार संहिता लागू—चार नगर निगमों में भी वोटिंग
हिमाचल में चुनावी बिगुल बज चुका है और अब सियासी सरगर्मी तेज होने वाली है।
17 मई को होने जा रहे शहरी निकाय चुनावों ने प्रदेश में चुनावी माहौल पूरी तरह गर्म कर दिया है।
शिमला। हिमाचल प्रदेश में शहरी निकायों के चुनाव की तारीखों का आधिकारिक एलान कर दिया गया है। हिमाचल प्रदेश राज्य निर्वाचन आयोग के आयुक्त अनिल खाची ने शिमला में प्रेस वार्ता के दौरान बताया कि राज्य के 51 शहरी निकायों में 17 मई 2026 को मतदान कराया जाएगा। इसके साथ ही पूरे प्रदेश में आचार संहिता भी तत्काल प्रभाव से लागू हो गई है।
इस चुनाव में चार नगर निगम—सोलन, मंडी, धर्मशाला और पालमपुर—के अलावा 25 नगर परिषद और 22 नगर पंचायतों में मतदान होगा। कुल मिलाकर लाखों मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग करेंगे, जिनमें बड़ी संख्या में महिला मतदाता भी शामिल हैं। खास बात यह है कि 18 वर्ष आयु वर्ग के 1800 से अधिक युवा पहली बार वोट डालेंगे। मतदाता “सारथी” मोबाइल ऐप के जरिए अपना और अपने परिवार का नाम भी आसानी से जांच सकते हैं।
चुनाव प्रक्रिया की बात करें तो नामांकन 29 और 30 अप्रैल के साथ 2 मई तक (दोपहर 3 बजे तक) भरे जा सकेंगे। 4 मई को नामांकन पत्रों की जांच होगी, जबकि 6 मई को नाम वापसी की अंतिम तिथि निर्धारित की गई है। उसी दिन उम्मीदवारों को चुनाव चिन्ह भी आवंटित कर दिए जाएंगे। मतदान 17 मई को सुबह 7 बजे से दोपहर 3 बजे तक होगा।
नगर पंचायत और नगर परिषदों के चुनाव परिणाम उसी दिन घोषित कर दिए जाएंगे, जबकि चारों नगर निगमों की मतगणना 31 मई को होगी। खर्च सीमा भी तय कर दी गई है—नगर निगम के उम्मीदवार अधिकतम 1 लाख रुपये, नगर परिषद के 75 हजार रुपये और नगर पंचायत के उम्मीदवार 50 हजार रुपये तक ही खर्च कर सकेंगे।
वहीं, पंचायती राज संस्थाओं के चुनाव को लेकर अभी इंतजार करना होगा। 27 अप्रैल को वोटर लिस्ट फाइनल होने के बाद ही इन चुनावों की घोषणा होने की संभावना जताई जा रही है।
चुनावों की घोषणा के साथ ही प्रशासनिक सख्ती भी बढ़ा दी गई है। राज्य निर्वाचन आयोग ने सभी उपायुक्तों, एसडीएम और अन्य अधिकारियों को अपने मुख्यालय में ही मौजूद रहने के निर्देश दिए हैं।
बिना जरूरी कारण कोई भी अधिकारी मुख्यालय नहीं छोड़ सकेगा। यह कदम सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के तहत उठाया गया है, जिसमें 31 मई तक स्थानीय निकायों का गठन सुनिश्चित करने को कहा गया है।
अब प्रदेश की नजरें 17 मई पर टिकी हैं, जहां शहरी सरकारों का फैसला जनता के वोट से होगा।
