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Chester Hill Case: सोलन में 7 घंटे तक चली बड़ी जांच, AG ऑफिस की रेड से तहसील में मचा हड़कंप
धारा 118 और बेनामी जमीन सौदों की परतें खुलने लगीं, सैकड़ों बीघा जमीन की खरीद पर उठे बड़े सवाल
सोलन में अचानक पहुंची AG टीम, रिकॉर्ड खंगालने से मचा हड़कंप
सोलन/शिमला। चेस्टर हिल मामले में जांच अब तेज हो गई है और मामला महालेखाकार (AG) कार्यालय तक पहुंच चुका है। शुक्रवार सुबह करीब 10:30 बजे AG ऑफिस की टीम ने सोलन तहसील में अचानक दबिश दी। टीम के पहुंचते ही तहसील कार्यालय में हड़कंप मच गया। अधिकारियों ने सीधे तहसीलदार कार्यालय पहुंचकर चेस्टर हिल प्रोजेक्ट से जुड़े सभी दस्तावेजों की गहन जांच शुरू कर दी।
सेल डीड, स्टांप ड्यूटी और जमीन की वैल्यू का पूरा हिसाब खंगाला
जांच टीम ने चेस्टर हिल में हुई जमीन की खरीद-फरोख्त से संबंधित सभी सेल डीड मंगवाए। साथ ही स्टांप ड्यूटी कितनी लगाई गई, जमीन की वास्तविक वैल्यू क्या थी और किन-किन नामों पर जमीन खरीदी गई—इन सभी पहलुओं की बारीकी से जांच की गई।
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सूत्रों के अनुसार, टीम ने खास तौर पर कृषक के नाम पर खरीदी गई जमीनों का पूरा रिकॉर्ड मांगा और यह भी जांचा कि नियमों के तहत जमीन खरीद हुई या नहीं।
7 घंटे चली जांच, टीम अपने साथ ले गई अहम दस्तावेज
करीब 7 से 7:30 घंटे तक चली इस कार्रवाई के बाद शाम लगभग 5 बजे टीम तहसील कार्यालय से निकली। इस दौरान चेस्टर हिल से जुड़े सभी महत्वपूर्ण दस्तावेज खंगाले गए और कई रिकॉर्ड अपने साथ ले जाए गए।
सैकड़ों बीघा जमीन खरीद पर सवाल, परिवार के नाम पर भी सौदे
जांच में सामने आया है कि एक ही कृषक के नाम पर सैकड़ों बीघा जमीन की खरीद-फरोख्त हुई है। इतना ही नहीं, सोलन के अलावा परवाणू क्षेत्र में भी उसी व्यक्ति ने अपनी पत्नी और दो बहनों के नाम पर जमीन खरीदी है, जिससे बेनामी संपत्ति के एंगल को और मजबूती मिल रही है।
ग्रामीणों का आरोप—जमीन बेचने और लीज पर देने का बनाया जा रहा दबाव
इधर, किसान सभा के प्रतिनिधिमंडल ने उपायुक्त सोलन से मुलाकात कर चेस्टर हिल प्रोजेक्ट को लेकर गंभीर आरोप लगाए हैं। प्रतिनिधिमंडल का कहना है कि परियोजना से जुड़े लोग ग्रामीणों पर जमीन बेचने या लीज पर देने का दबाव बना रहे हैं।
अवैध डंपिंग और बंद रास्तों पर भी उठे सवाल
ज्ञापन में यह भी मांग उठाई गई कि सरकारी नालों और आसपास के इलाकों में हो रही अवैध डंपिंग को तुरंत रोका जाए। साथ ही चरागाह (घासनियों) तक जाने वाले रास्तों को खोले जाने की मांग की गई।
प्रशासन ने दिया कार्रवाई का भरोसा
उपायुक्त ने प्रतिनिधिमंडल की बात सुनकर मामले में उचित कार्रवाई का आश्वासन दिया है। अब इस पूरे मामले में AG जांच के बाद क्या खुलासे होते हैं, इस पर सबकी नजर बनी हुई है।
