हिमाचल के सरकारी स्कूलों में फीस को लेकर बड़ा बदलाव होने वाला है।
अब हर जिले में अलग-अलग वसूली की जगह एक समान फीस सिस्टम लागू करने की तैयारी तेज हो गई है।
हिमाचल में सरकारी स्कूलों के लिए एक समान फीस ढांचा बनाने की तैयारी तेज
शिमला। हिमाचल प्रदेश में सरकारी स्कूलों की फीस को लेकर लंबे समय से चली आ रही असमानता को खत्म करने के लिए शिक्षा विभाग ने बड़ा कदम उठाया है। कक्षा नौवीं से बारहवीं तक के विद्यार्थियों के लिए एक समान फीस ढांचा लागू करने की दिशा में अब प्रक्रिया तेज कर दी गई है।
शिक्षा निदेशालय ने सभी जिला उपनिदेशकों से स्कूलवार फीस का विस्तृत ब्योरा मांगा है। इस रिपोर्ट के जरिए यह आकलन किया जाएगा कि वर्तमान में किन-किन मदों में कितना शुल्क लिया जा रहा है और किन जिलों में फीस संरचना में सबसे ज्यादा अंतर है। इसके आधार पर पूरे प्रदेश में एक समान और पारदर्शी फीस ढांचा तैयार किया जाएगा।
दरअसल, अभी कई जिलों में अलग-अलग मदों—जैसे विकास शुल्क, फंड, गतिविधि शुल्क आदि—के नाम पर अलग-अलग राशि वसूली जा रही है। इससे अभिभावकों में असंतोष बढ़ रहा था और कई जगह शिकायतें भी सामने आई थीं। इसी को देखते हुए सरकार ने एकरूपता लाने का फैसला लिया है।
मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने हाल ही में शिक्षा विभाग को निर्देश दिए हैं कि सरकारी स्कूलों में फीस को लेकर स्पष्ट और समान नीति बनाई जाए, ताकि किसी भी जिले के छात्रों के साथ भेदभाव न हो। उनके निर्देशों के बाद विभाग ने इस काम को प्राथमिकता में रखते हुए तेजी से कार्रवाई शुरू कर दी है।
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इसके अलावा प्रदेश के 155 चयनित सीबीएसई पैटर्न वाले सरकारी स्कूलों में भी यही फीस ढांचा लागू करने की योजना है। इन स्कूलों में अभी तक विभिन्न प्रकार के शुल्क लिए जा रहे हैं, जिन्हें अब एक निर्धारित मानक के तहत लाया जाएगा।
वीरवार को स्कूल शिक्षा निदेशक आशीष कोहली ने विभागीय अधिकारियों के साथ बैठक कर इस विषय पर विस्तार से चर्चा की। बैठक में यह तय किया गया कि फीस निर्धारण में पारदर्शिता, समानता और अभिभावकों पर आर्थिक बोझ कम करने को प्राथमिकता दी जाएगी।
यदि यह व्यवस्था लागू होती है तो प्रदेशभर के लाखों विद्यार्थियों और उनके अभिभावकों को सीधा लाभ मिलेगा। साथ ही, शिक्षा प्रणाली में एकरूपता आने से सरकारी स्कूलों की विश्वसनीयता भी मजबूत होने की उम्मीद है।
