Home समस्या कालाअंब के तहत भंडारीवाला क्षेत्र में नाला बंद करने पर बवाल! बरसात से पहले मंडराया बाढ़ का खतरा, प्रशासन पर उठे सवाल

कालाअंब के तहत भंडारीवाला क्षेत्र में नाला बंद करने पर बवाल! बरसात से पहले मंडराया बाढ़ का खतरा, प्रशासन पर उठे सवाल

by Dainik Janvarta
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कालाअंब के तहत भंडारीवाला क्षेत्र में नाले पर मिट्टी डालकर रास्ता बंद… बरसात में बढ़ सकता है बड़ा खतरा!

निजी जमीन बनाम सार्वजनिक हित—एक फैसले से उद्योगों पर मंडरा रहा संकट!

भंडारीवाला क्षेत्र में नाला बंद करने का मामला गरमाया

कालाअंब (सिरमौर)। औद्योगिक क्षेत्र के भंडारीवाला इलाके में एक नाले को बंद किए जाने का मामला सामने आया है, जिससे पूरे क्षेत्र में विवाद की स्थिति बन गई है। आरोप है कि एक निजी व्यक्ति ने अपनी जमीन में आने वाले हिस्से में मिट्टी डालकर नाले के प्राकृतिक बहाव को रोक दिया है।

बरसाती पानी के निकास पर संकट

जानकारी के अनुसार यह नाला वर्षों से पहाड़ी क्षेत्रों से आने वाले बरसाती पानी के प्राकृतिक निकास का प्रमुख रास्ता रहा है। यह पानी इंडो हर्बल एक्सट्रैक्शन और लैवेंडर डेयरी उद्योग के बीच से बहते हुए कालाअंब-गुरुद्वारा रोड पर बने तक पहुंचता था। अब इसके बंद होने से भविष्य में जलभराव का खतरा बढ़ गया है।

निजी जमीन का हवाला

जिस स्थान पर नाले को बंद किया गया है, वह करीब 30 फीट का हिस्सा निजी स्वामित्व वाली जमीन में आता है। इसी आधार पर संबंधित व्यक्ति द्वारा नाले के रास्ते को बंद करने की बात कही जा रही है, जिससे मामला और जटिल हो गया है।

उद्योगों ने जताई चिंता

एक उद्योग के प्रबंधक निदेशक डॉ. दान सिंह ने बताया कि यह केवल निजी जमीन का मामला नहीं है, बल्कि सार्वजनिक सुरक्षा और औद्योगिक हितों से भी जुड़ा हुआ है। उनका कहना है कि नाले के अवरुद्ध होने से बरसात के समय पानी का निकास रुक सकता है, जिससे आसपास के उद्योगों को भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है।

प्रशासन की भूमिका पर सवाल

इस पूरे मामले में प्रशासन की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठ रहे हैं। पुलिस में शिकायत दिए जाने के बावजूद अभी तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं होने से उद्योगों में असंतोष बढ़ता जा रहा है।

नियमों के उल्लंघन की आशंका

माना जा रहा है कि यदि यह नाला राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज प्राकृतिक जल निकासी मार्ग है, तो इसे बंद करना नियमों का उल्लंघन हो सकता है। ऐसे में प्रशासन के लिए जरूरी है कि वह तत्काल हस्तक्षेप कर स्थिति को स्पष्ट करे।

निजी अधिकार बनाम सार्वजनिक हित

फिलहाल यह मामला निजी अधिकार और सार्वजनिक हित के बीच उलझा हुआ नजर आ रहा है। यदि समय रहते इसका समाधान नहीं निकाला गया, तो आने वाले दिनों में यह विवाद गंभीर रूप ले सकता है।

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