शिमला में करोड़ों की दीवार ढही, फिर मंडराया खतरा… छात्रों की जान जोखिम में!
शिमला। राजधानी शिमला में एक बार फिर लैंडस्लाइड का डर लौट आया है। जिस सुरक्षा दीवार को लोगों की जान बचाने के लिए बनाया गया था, वही अब खतरे की वजह बनती नजर आ रही है।
बालूगंज क्षेत्र में शिव बावड़ी लैंडस्लाइड के बाद करीब 5 करोड़ रुपये की लागत से बनाई गई सुरक्षा दीवार शुक्रवार सुबह करीब 11 बजे अचानक ढह गई। हैरानी की बात यह है कि यह दीवार एक साल भी नहीं टिक सकी, जिससे निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
घटना के समय हालात तब और चिंताजनक हो गए जब बालूगंज से समरहिल चौक की ओर जा रही एक निजी बस के गुजरते वक्त अचानक मलबा गिरने लगा। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, दीवार पहले से ही कमजोर हो चुकी थी और लगातार छोटे-बड़े पत्थर सड़क पर गिर रहे थे, जिससे बड़ा हादसा टलते-टलते बचा।
यह सड़क हिमाचल प्रदेश यूनिवर्सिटी जाने वाले हजारों छात्रों और कर्मचारियों के लिए मुख्य मार्ग है। ऐसे में मौजूदा यूजी परीक्षाओं के बीच इस घटना ने छात्रों की सुरक्षा को लेकर चिंता और बढ़ा दी है। रोजाना सैकड़ों विद्यार्थी इसी रास्ते से परीक्षा केंद्रों तक पहुंचते हैं, लेकिन अब उन्हें खतरे के बीच सफर करना पड़ रहा है।
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स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया है कि दीवार का निर्माण जल्दबाजी में किया गया और तकनीकी मानकों की अनदेखी की गई। उनका कहना है कि यदि समय रहते स्थायी समाधान नहीं किया गया, तो यहां बड़ा हादसा हो सकता है।
प्रशासन की ओर से मौके का निरीक्षण किए जाने की बात कही जा रही है, लेकिन लोगों का साफ कहना है कि केवल औपचारिक जांच नहीं, बल्कि ठोस और स्थायी समाधान की जरूरत है।
गौरतलब है कि इसी स्थान पर 14 अगस्त 2023 को हुए भूस्खलन में शिव बावड़ी मंदिर में 20 लोगों की जान चली गई थी। ऐसे में एक बार फिर उसी जगह पर खतरे का मंडराना प्रशासन और निर्माण एजेंसियों की कार्यप्रणाली पर बड़े सवाल खड़े कर रहा है।
