हिमाचल PDS में सख्ती: खराब और संक्रमित गेहूं पर लगेगा ब्रेक, मिलर्स को कड़े निर्देश
शिमला। हिमाचल प्रदेश में सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) को लेकर अब सख्त रुख अपनाया गया है। राज्य खाद्य आयोग ने साफ कर दिया है कि अब निम्न गुणवत्ता और संक्रमित गेहूं किसी भी हाल में स्वीकार नहीं किया जाएगा। बुधवार को आयोजित अहम बैठक में आयोग ने मिलर्स को निर्देश दिए कि वे एफसीआई गोदामों से ही खराब गेहूं को मौके पर अस्वीकार करें, ताकि उपभोक्ताओं तक बेहतर गुणवत्ता का राशन पहुंचे।
बैठक की अध्यक्षता आयोग के अध्यक्ष डॉ. एसपी कत्याल ने की, जिसमें शिमला, बिलासपुर, सिरमौर और मंडी जिलों के आटा मिल मालिक शामिल हुए। चर्चा के दौरान गेहूं की खरीद से लेकर आटा बनने और वितरण तक की पूरी प्रक्रिया पर गहन मंथन किया गया।
आयोग ने यह भी तय किया कि सभी मिलर्स जिला नियंत्रकों को समयबद्ध तरीके से खरीद और मिलिंग की विस्तृत रिपोर्ट सौंपेंगे, जिससे पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता बनी रहे।
गुणवत्ता सुधार के लिए बैठक में फोर्टिफिकेशन प्रक्रिया को और सटीक बनाने पर जोर दिया गया। मिलर्स को माइक्रो-फीडर तकनीक अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया गया, ताकि पोषक तत्वों का सही अनुपात सुनिश्चित हो सके।
वहीं, पैकेजिंग से जुड़े मुद्दों पर भी विस्तार से चर्चा हुई। मिलर्स ने नमी में उतार-चढ़ाव के चलते वजन में थोड़ी सहनशीलता देने की मांग उठाई, जिस पर आयोग ने विचार करने का आश्वासन दिया।
इस फैसले के बाद उम्मीद है कि प्रदेश के लाखों राशन कार्ड धारकों को अब पहले से बेहतर गुणवत्ता का आटा और गेहूं मिल सकेगा।
