Home समस्या सिरमौर में ओलावृष्टि का कहर: टमाटर-शिमला मिर्च पूरी तरह तबाह, फलदार पेड़ों को भारी नुकसान

सिरमौर में ओलावृष्टि का कहर: टमाटर-शिमला मिर्च पूरी तरह तबाह, फलदार पेड़ों को भारी नुकसान

by Dainik Janvarta
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एक ही रात में बर्बाद हुई महीनों की मेहनत!

सिरमौर में ओलावृष्टि का कहर—सब्जियों से लेकर फलों तक सब तबाह, किसान सदमे में

सिरमौर में ओलावृष्टि से मचाई तबाही, नकदी फसलें चौपट—बागवानों को भी भारी झटका

नाहन (सिरमौर)। जिला सिरमौर में शनिवार देर शाम और रात को आई तेज ओलावृष्टि और अंधड़ ने किसानों और बागवानों की कमर तोड़ दी। जिले के पच्छाद, राजगढ़ और गिरिपार क्षेत्र सबसे ज्यादा प्रभावित रहे, जहां सब्जियों, अनाज और फलदार फसलों को व्यापक नुकसान पहुंचा है। कई इलाकों में ओलों की मार इतनी जबरदस्त थी कि पेड़ों की टहनियां तक टूट गईं और खेतों में खड़ी फसल बर्बाद हो गई।

पच्छाद उपमंडल के नारग, टिपरिया, वासनी, पाब, भलजा, मलोटी और छानत सहित कई गांवों में ओलावृष्टि ने तबाही मचाई। किसानों के अनुसार हाल ही में लगाई गई टमाटर और शिमला मिर्च की फसल पूरी तरह नष्ट हो गई है। तैयार मटर की फसल भी ओलों से दागदार हो गई, जिससे बाजार में अच्छे दाम मिलने की उम्मीद लगभग खत्म हो गई है। इसके अलावा गेहूं, जौ और तोड़िया जैसी फसलों को भी नुकसान झेलना पड़ा है।

किसानों का कहना है कि इस नुकसान से उन्हें दोबारा फसल लगाने की नौबत आ गई है, जिससे लागत और बढ़ेगी। बढ़ती महंगाई के बीच यह नुकसान उनके लिए बड़ा आर्थिक संकट बनकर उभरा है।

राजगढ़ क्षेत्र में भी हालात चिंताजनक बने हुए हैं। हाब्बन, नेरी कोटली, जदोल टपरोली, शाया सनौरा और रासुमान्दर जैसी ऊंचाई वाले क्षेत्रों में ओलावृष्टि ने प्लम, आड़ू, खुमानी और कीवी जैसी फलदार फसलों को नुकसान पहुंचाया है। ओलों के कारण फूल और कोमल पत्तियां झड़ गई हैं, जिससे इस सीजन की पैदावार पर असर पड़ना तय माना जा रहा है। तेज हवाओं से कीवी की टहनियां भी टूट गईं।

वहीं निचले क्षेत्रों ठौड़ निवाड़ और डिंबर में भी रविवार को ओले गिरने से गेहूं की खड़ी फसल झुक गई है, जिससे उत्पादन प्रभावित होने की आशंका है। आम की फसल पर भी अंधड़ का असर देखा गया है।

उधर, गिरिपार के ऊपरी क्षेत्रों—कफोटा, बेनाड, दुगाना, डाबरा, शावगा, शरली, मानपुर, माशू, जामना, खजूरी, कमरऊ और बोहलधार—में भी रविवार दोपहर बाद भारी ओलावृष्टि और तूफान ने स्टोन फ्रूट को नुकसान पहुंचाया। यहां आड़ू, प्लम, खुमानी और बादाम के पौधों को खासा नुकसान हुआ है। मटर की फलियों पर भी असर पड़ा है।

लगातार दूसरी बार हुई ओलावृष्टि से किसानों की चिंता और बढ़ गई है। उनका कहना है कि मौसम के इस बदलते मिजाज ने खेती को जोखिम भरा बना दिया है। उन्होंने प्रशासन से नुकसान का जल्द सर्वे कर उचित मुआवजा देने की मांग की है।

ओलावृष्टि और अंधड़ के कारण कई इलाकों में बिजली आपूर्ति भी बाधित रही, जिससे लोगों को घंटों ब्लैकआउट का सामना करना पड़ा।

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