सोलन में RLA घोटाले ने सिस्टम की बड़ी पोल खोल दी है।
फर्जी आईडी बनाकर बिना निरीक्षण ही वाहनों के रजिस्ट्रेशन कर करोड़ों का खेल खेला गया।
सोलन। हिमाचल प्रदेश के सोलन स्थित क्षेत्रीय परिवहन एवं लाइसेंसिंग प्राधिकरण (RLA) में हुए बड़े फर्जीवाड़े का पुलिस ने पर्दाफाश करते हुए दो क्लर्क और चार एजेंटों को गिरफ्तार किया है। यह नेटवर्क सिर्फ सोलन तक सीमित नहीं था, बल्कि बिलासपुर, मंडी, ऊना और कांगड़ा तक फैला हुआ था।
जांच में सामने आया कि बिलासपुर के झंडूता में तैनात क्लर्क गौरव भारद्वाज इस पूरे रैकेट का मास्टरमाइंड था। उसने सोलन RLA के सिस्टम में घुसकर फर्जी यूजर आईडी तैयार कीं और उन्हीं के जरिए वाहन पंजीकरण, वेरिफिकेशन और अप्रूवल की प्रक्रिया को अवैध तरीके से अंजाम दिया।
हैरानी की बात यह है कि कई वाहनों का पंजीकरण बिना मोटर वाहन निरीक्षक के निरीक्षण के ही कर दिया गया। जांच में यह भी खुलासा हुआ कि RLA सोलन के क्लर्क जितेंद्र ठाकुर की आधिकारिक आईडी के अलावा उनके नाम से मिलती-जुलती फर्जी आईडी और SDM डॉ. पूनम के नाम से भी नकली लॉगिन बनाए गए थे।
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पुलिस की तकनीकी जांच—जिसमें IP लॉग्स, OTP रिकॉर्ड और कॉल डिटेल्स शामिल हैं—ने पूरे नेटवर्क की परतें खोल दीं। इन फर्जी आईडी के जरिए न सिर्फ वाहन रजिस्ट्रेशन किए गए, बल्कि दस्तावेजों में भी हेराफेरी की गई। इसमें वाहनों का वजन बढ़ाना, मालिकाना हक में बदलाव, बैंक का नाम हटाना और ट्रांसफर प्रक्रिया को अवैध रूप से पूरा करना शामिल है।
जांच में यह भी सामने आया कि आरोपी गौरव ने एजेंटों का एक संगठित नेटवर्क तैयार कर रखा था, जिसमें राजकुमार, विकास सिंह उर्फ शालू, जितेंद्र और अनिल जैसे लोग शामिल थे। ये एजेंट लोगों से मोटी रकम वसूल कर उनके काम “सेटिंग” से करवाते थे।
पुलिस के मुताबिक, इस पूरे खेल में करोड़ों रुपये का लेनदेन हुआ है, जो अलग-अलग खातों के जरिए किया गया। 3 अप्रैल को पुलिस ने छह आरोपियों को गिरफ्तार कर उनके खिलाफ भारतीय दंड संहिता की विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज किया।
इस मामले की शुरुआत 26 जनवरी 2026 को हुई शिकायत से हुई थी, जब RLA सोलन की अधिकारी डॉ. पूनम बंसल ने दस्तावेजों में छेड़छाड़ और वाहन पोर्टल में अवैध एंट्री की शिकायत दर्ज करवाई थी।
मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने उप पुलिस अधीक्षक अशोक चौहान के नेतृत्व में विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया है। पुलिस अधीक्षक टी. एस. वर्मा ने बताया कि जांच अभी जारी है और इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की पहचान की जा रही है।
👉 साफ है कि यह मामला सिर्फ फर्जी रजिस्ट्रेशन तक सीमित नहीं, बल्कि पूरे सिस्टम में सेंध लगाने वाले बड़े रैकेट की ओर इशारा कर रहा है।
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