कालाअंब में रसोई संकट गहराया: गैस के दाम आसमान पर, चूल्हे ठंडे होने की कगार पर
कालाबाजारी के चलते चार गुना तक महंगी हुई LPG, हजारों परिवारों की मुश्किलें बढ़ीं
कालाअंब (सिरमौर)। औद्योगिक क्षेत्र कालाअंब में इन दिनों रसोई ईंधन का गंभीर संकट खड़ा हो गया है। गैस सिलिंडरों की कमी और बढ़ती कालाबाजारी ने हालात ऐसे बना दिए हैं कि आम आदमी की रसोई चलाना मुश्किल होता जा रहा है। बढ़ती कीमतों ने खासकर मजदूर वर्ग के परिवारों की कमर तोड़ दी है, जिससे पूरे क्षेत्र में चिंता का माहौल है।
गैस की कालाबाजारी ने बढ़ाई परेशानी
जानकारी के अनुसार कुछ दुकानदार चोरी-छिपे छोटे गैस सिलिंडरों में फुटकर गैस 350 से 400 रुपये प्रति किलो तक बेच रहे हैं। जिन लोगों के पास वैध गैस कनेक्शन नहीं है और जो अब तक कालाबाजारी के सहारे LPG का इस्तेमाल कर रहे थे, उन्हें अब चार गुना तक अधिक कीमत चुकानी पड़ रही है। एक सिलिंडर के लिए उपभोक्ताओं को करीब 4200 रुपये तक खर्च करना पड़ रहा है।
मजदूर वर्ग पर सबसे ज्यादा असर
कालाअंब औद्योगिक क्षेत्र में करीब 30 हजार परिवार निवास करते हैं, जिनमें बड़ी संख्या दैनिक मजदूरी करने वालों की है। महंगे ईंधन के कारण इन परिवारों का मासिक बजट पूरी तरह बिगड़ गया है। कई घरों में तो दो वक्त की रोटी बनाना भी चुनौती बन गया है।
जंगलों पर बढ़ता दबाव, पर्यावरण खतरे में
स्थिति की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि लगभग 60 प्रतिशत लोग अब ईंधन के लिए जंगलों का रुख कर रहे हैं। कालाअंब से सटे हरियाणा क्षेत्र में हरे पेड़ों की कटाई के मामले भी सामने आने लगे हैं, जिससे पर्यावरण संतुलन पर खतरा मंडरा रहा है।
लोगों में रोष, प्रशासन से राहत की मांग
स्थानीय लोगों महेश्वर सिंह, गोलू, अनीता, रामदयाल, नीतू, श्वेता, रजनी, कमल, सिमरन कौर, सुनीता, प्रीती, योगराज, टोनी और गुड्डू ने प्रशासन से जल्द हस्तक्षेप की मांग की है। उनका कहना है कि यदि गैस की आपूर्ति जल्द सामान्य नहीं हुई और कालाबाजारी पर सख्त कार्रवाई नहीं की गई, तो हालात और भी गंभीर हो सकते हैं।
वैकल्पिक ईंधन की मांग
लोगों ने प्रशासन से संकट की इस घड़ी में मिट्टी का तेल जैसे वैकल्पिक ईंधन उपलब्ध कराने की भी अपील की है, ताकि आम परिवारों को कुछ राहत मिल सके।
प्रशासन के सामने बड़ी चुनौती
फिलहाल प्रशासन के लिए यह स्थिति बड़ी चुनौती बन चुकी है। एक ओर जहां आम जनता की बुनियादी जरूरतों को पूरा करना जरूरी है, वहीं दूसरी ओर पर्यावरण संरक्षण को भी नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। आने वाले दिनों में प्रशासन की कार्रवाई ही तय करेगी कि इस संकट से लोगों को कितनी राहत मिल पाती है।
