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Himachal Entry Tax: 130 रुपये का नया नियम, राहत या नया बोझ?
विधानसभा में बड़ा फैसला, लेकिन सड़कों पर क्यों बढ़ रहा विरोध?
एंट्री टैक्स पर सरकार का बड़ा फैसला
शिमला। हिमाचल प्रदेश में एंट्री टैक्स को लेकर जारी विवाद के बीच मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने विधानसभा में बड़ा एलान किया है। सरकार ने एंट्री टैक्स का युक्तिकरण करते हुए अब पांच सीटर और 6 से 12 सीटर गाड़ियों के लिए एक समान 130 रुपये शुल्क तय कर दिया है।
पहले छोटी गाड़ियों से 70 रुपये और बड़ी गाड़ियों से 110 रुपये वसूले जाते थे, लेकिन अब दोनों श्रेणियों के लिए एक ही दर लागू कर दी गई है। सरकार का दावा है कि इससे व्यवस्था सरल होगी।
मासिक पास से स्थानीय लोगों को राहत
सरकार ने सीमावर्ती और टोल क्षेत्र के आसपास रहने वाले लोगों को राहत देने के लिए मासिक पास व्यवस्था जारी रखने का फैसला किया है।
टोल बैरियर के 5 किलोमीटर दायरे में रहने वाले हिमाचल, पंजाब और हरियाणा के निवासियों को यह सुविधा मिलेगी। हिमाचल में पास जारी करने का अधिकार तहसीलदार को, जबकि पड़ोसी राज्यों में SDM को दिया जाएगा। पास की दरें पहले की तरह ही रियायती रहेंगी और जल्द इसकी अधिसूचना जारी की जाएगी।
विधानसभा में उठा पारदर्शिता का मुद्दा
विधानसभा सत्र के दौरान भाजपा नेता सतपाल सत्ती ने एंट्री टोल व्यवस्था पर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि ठेकेदार इस व्यवस्था का दुरुपयोग कर रहे हैं और पारदर्शिता की कमी है।
सत्ती ने यह भी कहा कि हर साल नए नामों से कंपनियां बनाकर सिस्टम को प्रभावित किया जा रहा है, जिससे सरकार को भी नुकसान हो सकता है।
भाजपा का विरोध और सड़कों पर उतरने की चेतावनी
इस फैसले के खिलाफ पूर्व मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर के नेतृत्व में भाजपा विधायकों ने विधानसभा परिसर में प्रदर्शन किया।
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जयराम ठाकुर ने सरकार के फैसले को जनविरोधी बताते हुए कहा कि एंट्री टैक्स और पेट्रोल-डीजल पर सेस बढ़ाने से आम जनता और व्यापारियों पर सीधा असर पड़ेगा। उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि पड़ोसी राज्यों के ट्रांसपोर्टर और लोग विरोध में चक्का जाम कर सकते हैं, जिससे हालात बिगड़ सकते हैं।
सरकार vs विपक्ष: असली तस्वीर क्या है?
जहां सरकार इस फैसले को टैक्स व्यवस्था को सरल बनाने की दिशा में कदम बता रही है, वहीं विपक्ष इसे आम जनता पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ मान रहा है।
खासकर सीमावर्ती जिलों में रहने वाले लोगों और रोजाना आवाजाही करने वालों के लिए यह मुद्दा ज्यादा संवेदनशील बन गया है।
निष्कर्ष
एंट्री टैक्स को एक समान करने से सिस्टम भले आसान हुआ हो, लेकिन इसका असर जनता की जेब, पर्यटन और व्यापार पर कितना पड़ेगा—यह आने वाले समय में साफ होगा। फिलहाल, यह फैसला राजनीतिक और सामाजिक दोनों स्तरों पर बहस का बड़ा विषय बन चुका है।
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